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सिद्धू ने क्यों छोड़ी भाजपा, पत्नी नवजोत कौर ने किया खुलासा

Mon, 01 Aug 2016 08:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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navjot kaur
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अमृतसर पूर्व से भाजपा विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भाजपा और शिरोमणि अकाली को अलग-अलग होकर काम करना चाहिए। गठबंधन में रहकर भी दोनों पार्टियों में परस्पर विवाद ही रहता है। नवजोत सिंह सिद्धू ने अकाली- भाजपा गठबंधन को लेकर राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है। डॉ. कौर ने आम आदमी पार्टी के कनवीनर और नीतियों की प्रशंसा करते हुए आप में जाने के संकेत दिए।
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डॉ. कौर ने कहा कि सिद्धू ने अगर राज्यसभा या पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है तो वह सोच समझकर ही लिया होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पार्टी में अच्छे और बुरे लोग होते हैं और अनुशासन सभी को आपस में जोड़े रखता है। उन्होंने कहा कि यह कौन सा अनुशासन है कि अगर आप गलत के खिलाफ बोलते हो तो आपको पार्टी से ही निकाल दिया जाए। उन्होंने कहा कि सिद्धू परिवार को कभी भी सत्ता का लालच नहीं रहा उन्होंने जो भी निर्णय लिया है अध्यात्मिक विचारधारा से जुड़कर लिया है। उनका मुख्य उद्देश्य पंजाब के कल्याण के लिए काम करना है।

उन्होंने कहा कि अगर सिद्धू को लालच होता तो पार्टी 2014 में पंजाब छोड़कर किसी भी राज्य से सांसद के चुनाव के लिए टिकट दे रही थी, लेकिन उन्होंने इसे नहीं माना। उन्होंने कहा कि वह पार्टी छोड़ने का निर्णय सिद्धू से सलाह के बाद ही करेंगी। जब उनसे कहा गया कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल उन्हें मौकापरस्त कहते हैं तो उन्होंने कहा कि बादल से बड़ा अवसरवादी कोई नहीं है।
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अकाली- भाजपा एवं कांग्रेस को छोड़कर वे किस पार्टी को अच्छा मानती हैं के सवाल के जवाब में डॉ. कौर ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को वह एक बढ़िया नेता और व्यक्ति मानती हैं। वह विकास के हवाई दावे करने के बजाय आम आदमी की तरह काम करना पसंद करते हैं। उन्होंने आप के यूथ मैनिफेस्टो की भी प्रशंसा की और कहा कि इसमें आम आदमी से जुड़े हर मुद्दे को उठाया गया है।

वल्टोहा के खिलाफ खोला मोर्चा
विधायक नवजोत कौर सिद्धू से जब उन पर विरसा सिंह वल्टोहा की ओर से की जा रही टीका टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उनकी बात न करें। उन्होंने कहा कि वल्टोहा तो मानसिक रूप से बीमार हैं, तभी उनके उल्टे सीधे बयानों से पंजाब के हालात खराब होने की नौबत तक आ गई है। उन्होंने कहा कि वह अपना इलाज कराएं एवं सोच समझकर बोलें। भाजपा सांसद श्वेत मलिक के बारे में उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने निगम का खर्च चलाने के लिए केंद्र सौ करोड़ रुपये लाकर दिए, पार्टी ने उसकी कद्र नहीं की, बल्कि जो व्यक्ति पार्षद का चुनाव हारा है उसे राज्यसभा का सदस्य बना दिया।
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