घर में प्रैक्टिस करने के लिए ही घर के पीछे हॉल में मैट डाला तो व्यायाम करने के लिए कई उपकरण भी रख लिए। जिसके बाद पहलवान जितेंद्र के साथ रोजाना सुबह व शाम को व्यायाम के साथ ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। वहां रोजाना 4-6 घंटे तक प्रैक्टिस करते रहे। अनलॉक में जब बाहर प्रैक्टिस करने की अनुमति मिली तो कर्नाटक में पहुंचकर प्रैक्टिस शुरू कर दी। इस तरह से कोरोना काल में आराम से बैठने की जगह खुद ही प्रैक्टिस करने का तरीका निकाला और उसका काफी फायदा भी मिला।
मोबाइल पर पहलवानों को दांवपेंच बताए, घर रहकर करते रहे प्रैक्टिस: कुलदीप मलिक
भारतीय कुश्ती टीम के चीफ कोच कुलदीप मलिक भी लॉकडाउन में कुछ दिन घर में आराम से बैठे। लेकिन उसके बाद योजना बनाई गई कि जिस तरह से विद्यार्थियों को स्कूलों से मोबाइल के सहारे ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। उस तरह ही पहलवानों को मोबाइल या लैपटॉप से ऑनलाइन दांवपेंच सिखाए जाएं। चीफ कोच कुलदीप मलिक बताते हैं कि जब लॉकडाउन को बढ़ाया गया तो उन्हें लगने लगा कि यह अभी लंबा चलने वाला है। इसलिए ही ऑनलाइन कुश्ती व दांवपेंच के बारे में ट्रेनिंग शुरू कर दी गई।
पहलवानों को उन सभी कुश्ती की वीडियो दिखाई जाती थी, जिनमें बजरंग, विनेश आदि बड़े पहलवानों ने देश को गोल्ड मेडल दिलाए। उसके बाद पहलवानों को बताया जाता था कि उस कुश्ती में आखिर क्या बेहतर था, जिससे वह गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहे। इसके अलावा पहलवानों को प्रोत्साहित किया जाता था कि वह भी इस तरह से मेडल जीत सकते हैं और उनको दांवपेंच बताए गए, जिनकी वह घर में अकेले भी प्रैक्टिस कर सकते थे। इस तरह से पहलवानों को कुश्ती से जोड़कर रखा गया।
शूटरों को हुई परेशानी, किसी तरह खुद को फिट रख रहे: अंकुर मित्तल
वर्ल्ड चैंपियन शूटर अंकुर मित्तल कहते हैं कि अधिकतर शूटर दिल्ली की कर्णी सिंह अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस करते हैं। लेकिन कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण शूटिंग रेंज को बंद कर दिया गया। जिससे शूटिंग बंद हो गई और शूटिंग ऐसा खेल है, जिसकी कोई अपने घर भी प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। यह जरूर था कि पिस्टल व रायफल को हाथ में उठाने की प्रैक्टिस करते रहे और घर में खुद को फिट रखने के लिए व्यायाम करते रहे।
अनलॉक में कुछ खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने की अनुमति मिली तो उसमें भी केवल ओलंपिक कोटा लेने वाले शूटरों को कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आने की अनुमति है। इसलिए शूटर अभी तक प्रैक्टिस से बाहर हैं और शूटरों को सबसे पहले अपनी पुरानी स्थिति में आने के लिए मेहनत करनी होगी तो उसके बाद आगे के लिए प्रैक्टिस करनी पड़ेगी।