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हैदराबाद में दलित छात्र की सुसाइड पर आयोग सख्त, मोदी को पत्र

Thu, 21 Jan 2016 08:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हैदराबाद में दलित छात्र रोहित की सुसाइड के मामले पर सख्त होते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के वाइस चेयरमैन डॉ. राजकुमार वेरका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि हैदराबाद में पिछले दस वर्षों में नौ दलित छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। देश में खुदकुशी करने वाले दलित छात्रों की संख्या तीस से भी ज्यादा है।
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आरोप लगाया कि भाजपा के केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद देश भर में दलितों पर अत्याचार का ग्राफ बढ़ा है। यूटी गेस्ट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस केदौरान वीरवार को डॉ. वेरका ने कहा कि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी केछात्र रोहित वेमुला में आरएसएस और एबीवीपी की भूमिका है। वे उसे सस्पेंड कराने में लगे थे, साजिश कर रहे थे कि वह शिक्षा न प्राप्त कर सके।

भाजपा के सांसद और स्थानीय नेताओं ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर दबाव डाला। आईआईटी मद्रास में डॉ. अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन पर प्रतिबंध केआदेश भी स्मृति ईरानी ने ही दिए थे। देश भर में विरोध के बाद वह वापस लेने पड़े। सरकार का अब एक और झूठ सामने आया है।
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मोदी को पत्र लिखकर मामलों में दखल देने की मांग की

डॉ. वेरका ने बताया कि कहा गया था कि मामले में एक कमेटी बनाई गई, जिसके हेड एक दलित प्रोफेसर थे। अब पता लगा है कि वह दलित प्रोफेसर तो कमेटी में थे ही नहीं। घटना के बाद आयोग के चेयरपर्सन पीएल पूनिया मौके पर गए। आयोग के दखल के बाद एफआईआर हुई। अब साजिश की जा रही है कि एफआईआर पर कार्रवाई न हो।

वेरका ने कहा कि आयोग ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उनसे अपील की गई है कि दलित विद्यार्थियों पर अत्याचार के बढ़ते मामलों में दखल दें। हैदराबाद मामले में अपने मंत्री और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करे। डॉ. बीआर अंबेडकर का 125वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है। ऐसे मौकेपर देश को क्या संदेश दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने भी उन्हें ज्ञापन दिया है।

दलित विरोधी है पंजाब सरकार
डॉ. राजकुमार वेरका ने कहा कि पंजाब सरकार पूरी तरह दलित विरोधी है। यह सिर्फ दलितों की हिमायती होने का दावा करती है। सरकार ने न तो आरटीई लागू किया, न ही संविधान का 81वां और 85वां संशोधन। स्कॉलरशिप के मामले में पंजाब सबसे पीछे है। इसी साल पांच हजार स्टूडेंट्स ने कॉलेज छोड़ा।

पंजाब में दलितों के लिए एक भी स्कीम राज्य सरकार की नहीं है। शगुन स्कीम में केंद्र 15,300 रुपये देता है तो पंजाब सरकार 15 हजार देती है। विधवा पेंशन में केंद्र 262 रुपये देता है तो पंजाब सरकार 250 रुपये आगे देती है। एससी आबादी पर बजट का सिर्फ ढाई फीसदी खर्च होता है।
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