राष्ट्रीय जांच एजेंसी (फाइल फोटो)
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) से जुडे़ नार्को आतंकवाद मामले में मंगलवार को मोहाली स्थित विशेष अदालत में दो आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दायर किया है। आरोपियों में जसवंत सिंह उर्फ जस्सा निवासी गुरदासपुर व गुरसंत सिंह उर्फ गोरा निवासी तरनतारन शामिल हैं।
दोनों पर एनडीपीएस व गैरकानूनी गतिविधियों समेत कई धाराओं में आरोप लगे हैं। इससे पहले 10 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। सूत्रों के अनुसार, करीब चार हजार पन्नों के आरोपपत्र में आरोपियों के तंत्र से लेकर काम करने की शैली का विस्तार से खुलासा किया गया है। एनआईए ने साफ किया है कि आरोपी पाकिस्तान से आई हेरोइन के संग्रह, वितरण और बिक्री में शामिल थे। इसके माध्यम से जो भी पैसा कमाते थे, उसे आतंकी गतिविधियों में लगाते थे।
एनआईए की जांच में सामने आया है कि गुरसंत सिंह कोई प्यादा नहीं बल्कि आतंकी गिरोह के मुख्य सदस्यों में से एक था। वह गिरोह के मुख्य आरोपी इकबाल सिंह उर्फ शेरा के करीबी सहयोगी के रूप में हेरोइन की सुरक्षित आवाजाही में अहम भूमिका निभाता था। जांच में यह भी बात सामने आई है कि उसने कई अचल संपत्तियों और लग्जरी कारें खरीदी थीं, जिनका वह काले कारोबार में उपयोग करता था।
यह मामला अप्रैल 2020 में सदर थाना अमृतसर में दर्ज हुआ था। जब पुलिस ने हिलाल अहमद शेरगोजी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से 29 लाख रुपये बरामद हुए थे। इसके बाद मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी हिलाल 29 लाख रुपये की राशि लेने अमृतसर आया था।
आरोपी आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य था। वह कश्मीर घाटी के तत्कालीन कमांडर रियाज अहमद नायकू का करीबी था। इसके कारण भारत में हेरोइन की तस्करी और बिक्री में शामिल एक बड़े नार्को-आतंक मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ। इसके साथ ही पता चला था कि हवाला के जरिए पाकिस्तान से ड्रग व अन्य तरीकों से जम्मू-कश्मीर में एचएम आतंकियों की मदद की जाती थी। अभी फरार चल रहे अन्य आरोपी को काबू करने की कार्रवाई चल रही है।