दिल्ली में स्मॉग को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूलन के तेवर सख्त हो गए हैं। बुधवार को पराली से संबंधित केस की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। वहीं, पंजाब से जवाब मांगा कि उसने पराली जलने से रोकने के लिए क्या किया।
जानकारी के मुताबिक एनजीटी ने दिल्ली सरकार से कहा कि सिर्फ स्कूल बंद करने से क्या बच्चे सुरक्षित हो जाएंगे। उनके घरों में प्रदूषण नहीं है क्या। प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर क्या कार्रवाई की गई। केंद्र और राज्य सरकार को पिछले साल कमेटियां बनाने को कहा गया था। ताकि समय रहते एहतियाती उपाय किए जा सकें।
लेकिन इस बार भी कुछ नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार से उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। सूबे की ओर से कहा गया कि इस बार पिछले साल की तुलना में तीस प्रतिशत पराली कम जलाई गई है। ट्रिब्यूनल के निर्देश पर जिस गांव कल्लर माजरी को अडॉप्ट किया गया था, वहां पराली बिल्कुल नहीं जलाई गई।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंजाब को पराली प्रबंधन केलिए 48.50 करोड़ की ग्रांट दी गई है। जबकि, पंजाब का कहना था कि इस ग्रांट में किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनरी खरीदने को चालीस फीसदी सब्सिडी दी जाती है। उस चालीस फीसदी में भी केंद्र का साठ प्रतिशत और राज्य का चालीस प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में किसानों को अपनी ओर से काफी रकम खर्च करनी पड़ती है।
इसलिए केंद्र सरकार हमें सौ फीसदी हिस्सा दे। इस केस में नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन को पक्ष रखना था कि वह कितनी पराली का उपयोग कर सकता है। लेकिन एनटीपीसी ने जवाब देने को एक सप्ताह का समय मांग लिया। पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एनजीटी में एक और याचिका दायर की गई थी। अब ट्रिब्यूनल वीरवार को दोनों याचिकाओं की इकट्ठी सुनवाई करेगा।