चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग ने पंडित मदनमोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर परिचर्चा का आयोजन किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि शिक्षा नीति रोजगार की राह खोलने के साथ-साथ लोगों के कौशल विकास में मदद करेगी। इस नीति को बनाने में समय लगा है, क्योंकि पूरे देश के लोगों के सुझाव इसमें समाहित किए गए हैं ताकि कोई कमियां न रहे। सरकारी स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक पंख लगेंगे।
विभागाध्यक्ष प्रो. बैजनाथ ने पंडित मदनमोहन मालवीय व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर प्रकाश डाला। उसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत हर भाषा को महत्व मिला है। हिंदी इसके जरिए और मजबूत होगी। सरकारी स्कूलों से ही हिंदी को और बढ़ावा मिलेगा। कौशल विकास का कार्य कक्षा आठ से ही शुरू हो जाएगा। उसके जरिए विद्यार्थी अपने भविष्य का रास्ता तय कर सकेंगे। एलुमनी डॉ. ज्योति शर्मा ने कहा कि शिक्षा साक्षरता से बड़ी होती है। डॉ. आदित्य अंगीरस का विचार है कि शिक्षा सद्गुणों को विकसित करती है। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बैजनाथ प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन, समन्वय और उत्थान के लिए है। इस परिचर्चा में विद्यार्थी, शोधार्थी, एलुमनी और बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य भी शामिल हुए।