नाटक में कोई सेट नहीं है, सिर्फ बॉडी वर्क से सभी दृश्यों को जीवंत करने की जिम्मेदारी थी। ऐसा अमूमन मंच पर तभी होता है, जब आर्टिस्ट को अपनी अदाकारी के ऊपर पूरा विश्वास हो।
नाटक बरी के मंचन के पहले यही कुछ चल रहा था। पीयू के इंग्लिश ऑडीटोरियम में नाटक बरी का मंचन किया गया। पाकिस्तान के लेखक शाहिद नदीम के लिखित नाटक का निर्देशन प्रोफेसर राणा नयर ने किया। नाटक शाहिद नदीम की पत्नी द्वारा पाकिस्तान की एक जेल में बिताए दिनों के ऊपर आधारित है।
नाटक की शुरुआत एक दरगाह से होती है, जहां मरियम नाम की एक औरत कव्वालियों को सुनकर नाचना शुरू कर देती है। इस पर लोग भड़क जाते है और उसे पीटते हैं। इस दौरान उसके साथ बलात्कार भी होता है, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया जाता है।
दूसरे दृश्य में जन्नत बीवी एक फौजी के यहां काम करती है, एक दिन उसका लड़का एक टेप रिकॉर्डर चोरी कर लेता है, जमीला अपने बच्चे को बचाने के लिए यह आरोप अपने ऊपर ले लेती है। और जेल चली जाती है, इस बीच एक औरत जमीला हुसैन अपने पति के खून के जुर्म में जेल चली जाती है।
जमीला हुसैन को अंत में फांसी, मरियम के बलात्कार के बाद गर्भवती होने पर गर्भपात करवा दिया जाता है। जन्नत बीवी का बेटा आखिर में पकड़ा जाता है, जिससे जन्नत को अंत में रिहा कर दिया जाता है।
नाटक में शीतल लालोतरा ने जाहिदा जमान का, निकिता शर्मा ने जमीला हुसैन, रुचिका सिंह ने जन्नत बीवी और एश्वर्या ने मरियम का किरदार निभाया। नाटक में लाइट्स प्रवीण जग्गी की रही।