प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और केंद्र सरकार में शिअद को श्री आनंदपुर साहिब के 350वें स्थापना दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला कर बड़ा झटका दिया है। इससे एक बार फिर गठबंधन के दोनों दलों के बीच मतभेद और बढ़ जाएगा।
प्रधानमंत्री श्री आनंदपुर साहिब समारोह में शामिल होते तो बादल का कद विपक्ष के साथ-साथ पंजाब भाजपा पर भी खासा असर डालता। इसके अलावा वे राज्य के लिए कुछ घोषणाएं भी करवा सकते थे।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह कोई पहली बार मतभेद पैदा नहीं हुआ है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और बादल के बीच बार मतभेद तब शुरू हुआ जब इंटर स्टेट काउंसिल की मीटिंग में बादल ने पंजाब को लेकर कई मांगें केंद्र के समक्ष उठाई थीं।
बादल ने मोदी पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया
मीटिंग में बादल ने यह कह कर मोदी को साधने की कोशिश की थी कि पिछले 65 साल से केंद्र की कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार किया। पंजाब सूबा सरहदी है। यहां के लोगों ने देश की आजादी में सबसे ज्यादा कुर्बानी दी है, लेकिन अब तक अन्याय होता रहा है।
अब केंद्र में अकाली-भाजपा की सरकार है। सभी लोगों ने एनडीए छोड़ दिया, लेकिन शिअद हमेशा भाजपा के साथ रही। पंजाब निवासियों के लिए इससे अच्छा मौका नहीं आएगा। उस मीटिंग में बादल ने पंजाब के पानी का मसला, राजधानी चंडीगढ़, हरियाणा और राजस्थान के पंजाबी भाषी इलाके पंजाब को सौंपने का मुद्दा उठाया।
बादल ने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि राज्यों को अधिक अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फसलों की कीमत तय करने का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। पंजाब भाजपा के नेताओं का कहना था कि बादल की यह बात प्रधानमंत्री मोदी को नागवार गुजरी थी।
पंजाब भाजपा जताती रही है नाराजगी
पंजाब भाजपा बार-बार दबे सुर में इस बात पर नाराजगी जताती रही है कि केंद्रीय नेतृत्व से अच्छे संबंधों का फायदा उठाकर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल राज्य के मामलों में उनकी अनदेखी करते हैं।
अभी कुछ दिन पहले के दो ऐसे मामले हैं, पहला दूसरे राज्यों से थोक चीनी लाने पर टैक्स और दूसरा दिल्ली बम कांड के अभियुक्त दविंदर पाल सिंह भुल्लर को तिहाड़ से अमृतसर जेल में शिफ्ट करने का। भाजपा इन फैसलों से खुश नहीं है। इससे पहले राज्य में निकाय चुनाव के दौरान दोनों सहयोगी दलों के बीच मनमुटाव सामने आया था।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि अकाली दल ने वार्डबंदी इस तरह से कराया, जिससे भाजपा कमजोर हुई। इसके बाद शिअद ने भाजपा प्रत्याशियों के सामने बागी उम्मीदवार उतार दिए। इस तरह की तमाम शिकायतों को पंजाब भाजपा ने अपने केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया था।
भाजपा के मंत्री दखल से नाखुश
भाजपा के पंजाब में चार मंत्री हैं। इनमें से दो मंत्रियों के विभाग उद्योग और स्वास्थ्य पर तकरीबन सभी फैसले सुखबीर बादल ही करते हैं। वही अधिकारियों की मीटिंग भी लेते हैं। सुखबीर की दखल से मंत्री केवल नाममात्र के रह गए हैं। दो दिन पहले भाजपा कोर कमेटी की बैठक में मंत्रियों और नेताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि आप बार-बार यह कह कर चले जाते हैं कि हम फैसला लेंगे, लेकिन होता कुछ नहीं है।
बादल राज्य भाजपा को कुछ समझते नहीं, वे सीधे केंद्र से बात करते हैं। कार्यकर्ताओं की गाली हमें खानी पड़ती है। बैठक में शामिल भाजपा केएक नेता ने बताया कि आप लोग जुलाई-अगस्त तक काम कीजिए। फिर हम देखेंगे कि क्या करना है। पिछले महीने अमृतसर में राज्य भाजपा की मीटिंग में शाह ने कहा था कि आप अपनी तैयारी रखिए। गांवों में जनाधार बढ़ाइए। हम देखेंगे।
भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पता था कि श्री आनंदपुर साहिब समारोह में शामिल होने पर प्रकाश सिंह बादल पंजाब के लिए आर्थिक पैकेज की मांग करेंगे, जो उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकता था, इसीलिए वे खुद को नहीं आए और वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी नहीं भेजा।