यह तथ्य सार्वजनिक है कि नरेंद्र मोदी और उस महिला की शादी अल्हड़ उम्र में हुई थी। वे कभी साथ नहीं रहे। मोदी ने खुद को आध्यात्मिक और राजनीतिक गतिविधियों के लिए समर्पित किया।
महिला अपने माता-पिता के साथ रहती थीं और स्कूल में शिक्षिका हैं। मोदी इससे पहले अपनी पत्नी और उसकी संपत्ति के कॉलम को खाली छोड़ते थे। लेकिन सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हलफनामे का कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए अपनी शादी के बारे में नरेंद्र मोदी ने एक सच्चा खुलासा किया।
जबसे उन्होंने इसकी घोषणा की है तो यह एक राजनीतिक मुद्दा क्यों बन गया है। भारतीय राजनीति का एक अनकहा नियम है। आमतौर पर हम परिवार और महिलाओं को विवादों में नहीं खींचते। राहुल गांधी ने उस नियम का उल्लंघन किया है।
उन्हें यह याद रखना चाहिए कि एक पूर्व प्रधानमंत्री के खराब वैवाहिक संबंध कभी भी एक राजनीतिक मुद्दा नहीं थे। अगर लोगों को मोदी के कानूनी रिश्ते के बारे में जानने का हक है तो फिर उन्हें कांग्रेसियों के अवैध संबंधों के बारे में जानकारी रखने का भी हक है।
मोदी की शादी को एक राजनीतिक मुद्दा बनाना राहुल गांधी की गंभीर राजनीतिक मुद्दों की असमझ और उनकी नादानी को दर्शाता है।