मोदी के चंडीगढ़ आने से पहले ही लोगों के अच्छे दिन आ गए। प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगें मानकर उन्हें तोहफा दे दिया। दरअसल, वेलफेयर स्कीम के तहत पीजीआई के कर्मचारियों का पिछले तीन वर्षों से करीब 50 लाख रुपया रुका था।
कर्मचारी बार-बार अधिकारियों से गुहार लगा रहे थे, उनके रुपये वापस किए जाएं, लेकिन हर बार उनकी बात को अनसुना कर दिया जा रहा था। कुछ दिन पहले पीजीआई इंप्लाइज यूनियन ने धमकी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो पीजीआई में आंदोलन करेंगे।
पीजीआई प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और यूनियन के साथ बैठक की। यूनियन की कई अन्य मांगें भी थी, लेकिन प्रशासन ने उनकी दो प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। पहली मांग वेलफेयर फंड का रुपया कर्मचारियों को देना और दूसरा लेबोट्ररी अटेंडेंट को लेबोट्ररी असिस्टेंट बनाने की मंजूरी दे दी है।
इससे लेबोट्ररी अटेंडेंट में खुशी की लहर है। दोनों ही डिमांड काफी दिन से पेंडिंग थी। यूनियन के जनरल सेक्रेटरी जसवीर सिंह ने बताया कि उनकी कई मांगें अब भी रहती हैं, जिसे थर्ड कैडर में पास करवाने का आश्वासन दिया गया है।
जसवीर सिंह ने बताया कि साल 1995 में पीजीआई के वेलफेयर डिपार्टमेंट ने एक स्कीम शुरू की थी। इसके मुताबिक कर्मचारियों के सैलरी से हर महीने 15 रुपये कटने थे। उसके एवज में कर्मचारियों को जमा कराई गई राशि के दोगुने रुपये मिलने थे।
साल 2012 में स्कीम बंद कर दी गई थी, लेकिन कर्मचारियों को रुपया नहीं लौटाया जा रहा था। इससे कर्मचारियों में गुस्सा बढ़ रहा था। यूनियन के दबाव में पीजीआई प्रशासन ने नोटिस जारी कर कहा कि दस दिन के भीतर स्कीम के तहत लाभार्थी कर्मचारियों के अकाउंट में रुपये आ जाएंगे।