पंजाब में बड़े स्तर पर फैले नार्को टेररिज्म के तार अफगानिस्तान से जुड़े हैं। जहां से शुरू होकर नशा पंजाब होते हुए देश भर में पहुंचता है। पुलिस खुद मानती है कि दिल्ली और मुंबई सहित देश के अन्य शहरों तक सक्रिय ड्रग तस्करों के लिए पंजाब बेहद मुफीद रास्ता है।
इतना ही नहीं लगातार हुए खुलासों से यह बात सामने आ चुकी है कि पंजाब में तस्करों का नेटवर्क हर ओर फैला हुआ है। इस धंधे से तस्कर न केवल काली कमाई कर रहे हैं, बल्कि पंजाब की युवा पीढ़ी को गर्त में धकेल रहे हैं। इस काले धंधे में लिप्त करीब 11 एनआरआई ऐसे हैं, जिनकी तलाश पंजाब पुलिस को है।
पुलिस लगातार यह दावे करती रही है कि वांछित एनआरआई विदेशों में छिपे हुए हैं। इन्हें पंजाब की अदालतें भगोड़ा करार दे चुकी हैं और अब इंटरपोल इन्हें भारत लाने के प्रयास में जुटी है। यह सारी तस्वीर वह दस्तावेज बयान करते हैं, जो पंजाब पुलिस या ड्रग्स रैकेट की सीबीआई जांच की मांग कर रहे याचियों की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेश किए गए हैं।
पंजाब पुलिस के डीआईजी बलकार सिंह सिद्धू ने हाईकोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा था कि पुलिस को ड्रग्स तस्करी से जुड़े विदेशों में मौजूद 11 भगोड़ों की तलाश है। इनके गिरफ्तारी वारंट हासिल किए जा चुके हैं। इंटरपोल से तालमेल के लिए सीबीआई को ही एनसीबी के तौर पर अधिसूचित किया हुआ है।
इंटरपोल इंडिया को सीबीआई की को-ऑर्डिनेशन डिवीजन के साथ तालमेल के लिए आईसीपीओ डेजिगनेट किया गया है। इसे इंटरपोल इंडिया भी कहते हैं। आईसीपीओ ने ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से इन 11 तस्करों के रेड नोटिस जारी करवा लिए हैं। रेड नोटिस के मायने यह हैं कि इन तस्करों की लोकेशन पता कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। एक बार पता लगने पर संबंधित देश ऐसे वांछित व्यक्ति को भारत को सौंपेगा।
ये हैं वे मोस्ट वांटेड तस्करी, जिनकी तलाश पुलिस को
कौन-------------------------------------------कहां
मनदलाल उर्फ मिक्क सामंतपुर (फगवाड़ा)----------यूके
हरबंस सिंह सिद्धू बुर्ज (लुधियाना)----------------कनाडा
गुरसेवक सिंह लील मेघ सिंह (लुधियाना)---------कनाडा
अमरजीत सिंह मेहमदपुर (जालंधर)---------------कनाडा
दारा सिंह मठेडा कलां (जालंधर)------------------कनाडा
प्रदीप सिंह लील मेघ सिंह (लुधियाना)-------------कनाडा
लहंबड़ सिंह महसिमपुर (जालंधर)---------------कनाडा
सरजीत सिंह बालियों (समराला)-----------------कनाडा
निरंकार सिंह ढिल्लों अप्परा (फिल्लौर)------------कनाडा
प्रमोद शर्मा टोनी करोल बाग (नई दिल्ली)----------कनाडा
मनिंदर छीना लाडी झंजोटी (अमृतसर)------------कनाडा
वित्त मंत्रालय ने सीज की थी 5 लोगों की प्रापर्टी
ड्रग के धंधे के अभियुक्तों की ओर से निवेश की आशंका के मद्देनजर केंद्रीय वित्त मंत्रालय पंजाब में पांच लोगों की प्रापर्टी सीज कर चुका है। यह संपत्तियां स्मग्लर्स एंड फॉरेन एक्सजेंच मेनिपुलेर्ट्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत सीज की गई थीं।
मंत्रालय का अनुमान है कि इन संपत्तियों की कीमत करीब 110.6 करोड़ है। वित्त मंत्रालय ने इन संपत्तियों का राजस्व रिकार्ड भी तलब किया था, ताकि इस बात का खुलासा किया जा सके कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अघोषित संपत्ति कैसे बनी।
खाड़ी से आकर मुंबई और दिल्ली से बंटता है नशा
डीआईजी बलकार सिंह सिद्धू ने हाईकोर्ट में कहा था कि आतंकवाद के बाद से नार्को टेररिज्म पर एनसीबी और ईडी जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों से सूचनाएं साझा की जाती हैं। विश्व में हेरोइन उत्पादित प्रमुख देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान हैं। यहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग सप्लाई के लिए दिल्ली और मुंबई में बने अड्डों तक ड्रग्स पहुंचाने के लिए पंजाब और अन्य पड़ोसी राज्यों से लगते अंतरराष्ट्रीय सीमा को चुना जाता है।
दिल्ली और मुंबई से ही देश व विदेश में ड्रग्स वितरण हो रहा है। ताजा मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि लाहौर के तस्कर बग्गा चेयरमैन के लिए काम करने वाले बरेली (उत्तर प्रदेश) के सुरिंदर कुमार और अजीत सिंह जीता को गिरफ्तार किया गया। बताया था कि नशा सप्लाई की चेन का पर्दाफाश करने के लिए पंजाब पुलिस तरीके से काम कर रही है।
सीमा पर लेजर से जांच की उठी थी मांग
लॉयर्स फार ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल ने इसी मामले में अर्जी दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया था कि बीएसएफ के डायरेक्टर ने अपने खुले बयान में यह कहा था कि सीमा पर सुरक्षा के लिए तार बाड़ पर करेंट का प्रावधान है। ऐसे में सीमा पार से हो रही ड्रग तस्करी की जांच नहीं हो पाती।
बीएसएफ का यह बयान भी था कि ड्रग तस्करी प्लास्टिक की पाइप के माध्यम से हो रही है। करेंट की बजाय यदि लेजर बीम का इस्तेमाल शुरू किया जाए तो प्लास्टिक की पाइप में की जा रही तस्करी पकड़ी जा सकेगी। अब केंद्र सरकार ने बीएसएफ को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन हाईकोर्ट को दिया है।
नार्को टेररिज्म का पंजाब पर पड़ रहा प्रभाव
वर्ष 2014 में पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा था कि 19 जून से 30 जुलाई तक पुराने दो लाख नशेडि़यों को नशामुक्ति केंद्रों में पहुंचाया गया। वहां इनका इलाज कराया गया है। इस कार्य में पुलिस स्वास्थ्य विभाग की मदद दे रही है। गांवों में जाकर नशेडि़यों की पहचान के बाद उन्हें नशामुक्ति केंद्रों में पहुंचाया जा रहा है।
यह हुई बरामदगी
वर्ष 2014 में यह भी बताया गया था कि वर्ष 2003 से अब तक नशे के खिलाफ मुहिम में सालाना हजारों मामले दर्ज किए जाते रहे हैं। वर्ष 2014 में एनडीपीएस के 10830 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 12695 व्यक्ति गिरफ्तार किए गए थे। बड़ी तस्करी में चार क्विंटल हेरोइन पकड़ी गई थी। गलियों में बिकने वाले नशे के कैप्सूल और गोलियों की ओर विशेष ध्यान दिया गया। वर्ष 2013 में तीन लाख 23 हजार 56 कैप्सूल और तीन करोड़ छह लाख 52 हजार 590 गोलियां जब्त की गईं।
11000 तस्करों के नाम किए थे उजागर:
जालंधर की एक एनजीओ के संचालक शशि शर्मा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर 11000 से अधिक कथित तस्करों के नामों की सूची पेश की थी। इसमें पटियाला से 1469, कपूरथला से 1873, होशियारपुर से 498, फिरोजपुर से 2100, लुधियाना से 2478 और अमृतसर से जुड़े2650 लोगों के नाम शामिल हैं। शर्मा इससे पहले जालंधर से 2787 नाम पेश कर चुके थे।