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18 अगस्त को ससुराल के लिए निकलेंगी मां नंदादेवी

Fri, 23 May 2014 05:33 PM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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19 दिन, 280 किमी का पहाड़ी सफर और 19 पड़ाव। 18 अगस्त से शुरू हो रही नंदादेवी राजजात यात्रा के लिए भक्तों को धार्मिक यात्रा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
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इस यात्रा में श्रद्घालु मां नंदादेवी को मायके से ससुराल (कैलाश) छोड़ने जाते हैं। इस लिए इसे नंदादेवी राजजात यात्रा कहा जाता है। इस यात्रा में शामिल होने के श्रद्घालु दूर-दूर से यहां आते हैं।

इस यात्रा पड़ाव में पड़ने वाले गांव के लोग कहीं भी हो यात्रा के गांव में पहुंचने से पहले इसके स्वागत के लिए पहुंच जाते हैं। इस बार इस यात्रा में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ से भी श्रद्घालुओं का जत्था जाएगा।
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साथ ही भक्तों के लिए चंडीगढ़ से राशन भेजा जाएगा। चमोली के नौटी गांव से सटे थराली में हेमकुंड गौ जनकल्याण समिति भंडारा आयोजित करेगी।

हेमकुंड गौ जनकल्याण समिति के चेयरमैन बीएस बिष्ट ने बताया कि मां नंदादेवी राजजात यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। चमोली के थराली गांव में विशाल भंडारा होगा।

इसके लिए चंडीगढ़ से ट्रक में भरकर सामान भेजा जाएगा। इस यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में चंडीगढ़ से भी लोग जाएंगे।

यहां-यहां से गुजरेगी यात्रा
मां नंदा देवी राजजात यात्रा की शुरुआत नौटी गांव से होकर इंद्रावधनी, कंसोवा, सेम, कोटी, भगवती, कुलसारी, चेपनुए, नंदकेसरी, फलदियां गांव, मुंडोली, वान, गैरोली, पाताल, पातर, नचौनिया, रूपकुंड, जेउरागली, शिला समुद्र और होमकुंड में यात्रा संपन्न होने के बाद वापसी होगी।

यह है यात्रा का महात्म्य  
यह यात्रा हर 12 वर्षों में उत्तराखंड के चमोली जनपद के नौटी गांव से अगस्त में शुरू होती है। ऐसी मान्यता है कि मां नंदा देवी (शैलपुत्री) मायके से ससुराल कैलाश पर्वत को जाती हैं।

श्रद्घालु डोली में बिठाकर उन्हें कैलाश पर्वत पर विदा करके आते हैं। 19 दिन की यह यात्रा हिमालयी क्षेत्र के अनेक दशर्नीय और रमणीक स्थानों से होकर 280 किमी के दुर्गम रास्तों को पार करते हुए होमकुंड नामक स्थान पर पहुंचती है।
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