शहर में लावारिस कुत्तों के आतंक की रोकथाम के लिए दायर हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने हैरान करने वाले जवाब दिया।
निगम ने अपने जवाब में कहा था कि पिछले चार सालों में किसी व्यक्ति को कुत्ते के काटने का केस सामने नहीं आया। इस पर याचिकाकर्ता ने तथ्य पेश किया है कि डॉग बाइट का केस ही नहीं, बल्कि कुछ दिन पहले डॉग बाइट की वजह से नवदीप गुप्ता नामक एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है।
इस तथ्य पर हाईकोर्ट ने निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। निगम ने बुधवार को एक जवाब में स्पष्ट किया कि कई लोगों को काटने के बाद मरा कुत्ता रेबीज़ से पीड़ित था।
इस मामले में रिपोर्ट आ गई है और कुत्ते के रेबीज़ होने की पुष्टि हुई है। इस मामले में हस्तक्षेप करने वाली पीपुल्स फॉर एनिमल्स (पीएफए) संस्था को भी प्रतिवादी बना लिया गया है।
संस्था ने अपना पक्ष रखने के लिए अर्जी दायर की थी। संस्था का कहना था कि जानवरों के अंग काटना उन पर जुल्म करने के बराबर है। निगम द्वारा कुत्तों की नसबंदी के दौरान मादा कुत्तों का गर्भाशय तक निकाला जाता है।