नगर निगम की प्रॉपर्टी की सुरक्षा अब प्राइवेट कमांडो करेंगे। वे निर्धारित एरिया में रात-दिन पेट्रोलिंग करके सारे इलाके पर नजर रखेंगे। कहीं पर भी निगम की प्रॉपर्टी को कोई नुकसान पहुंचाता दिखा, तो उस पर शिकंजा कसेंगे।
नगर निगम के लिए सामान की चोरी या खराब करना बड़ा सिरदर्द बन चुका था। आए दिन स्ट्रीट लाइटों के जंक्शन बॉक्स से तारें चोरी हो जाती थीं। पार्कों की रेलिंग भी कई जगह चोरी हो चुकी है।
निगम के पास इतना स्टाफ नहीं है जो सारे शहर पर नजर रख सके। इसलिए निगम ने पहली बार अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी कंपनी को देने का फैसला किया है।
कंपनी द्वारा तैनात किए गए पूर्व फौजी शहर की सुरक्षा करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में शहर के चुनिंदा हिस्सों को लिया गया है।
पहले फेज में आठ फेजों और दो इंडस्ट्रियल फेजों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपने की योजना बनाई गई है।
इसमें फेज एक, 3बी2, पांच, छह, सात, नौ, दस और 11 के अलावा इंडस्ट्रियल एरिया फेज सात और नौ शामिल हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को एक साल के लिए सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
प्रयोग सफल रहा तो शहर के बाकी इलाकों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। निगम ने कंपनी के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं।
कंपनी द्वारा जो कमांडो शहर में तैनात किए जाएंगे, वे हफ्ते में सातों दिन 24 घंटे पेट्रोलिंग करेंगे। वे निगम की प्रॉपर्टी, जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखेंगे। कोई भी गड़बड़ मिलने पर कार्रवाई करेंगे।
कमांडो मार्केटों में अवैध कब्जों के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे। ये कमांडो निगम के कंट्रोल रूम के संपर्क में रहेंगे। निगम के एडिशनल कमिश्नर (टेक्निकल) बीडी सिंगला ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि सारी तैयारी कर ली गई है। जनवरी 2014 में योग्य कंपनी को काम सौंप दिया जाएगा।
पंचकूला की तर्ज पर सौंपी जिम्मेदारी
नगर निगम ने पंचकूला की तर्ज पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी की है। पंचकूला में हुडा ने कुछ सेक्टरों में सुरक्षा की कमान निजी कंपनी को दी है। इसी मॉडल को अपनाते हुए निगम ने भी सुरक्षा की कमान निजी कंपनी को देने का फैसला किया है।
मॉनिटरिंग कमेटियां भी रखेंगी नजर
नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश पर शहर में मॉनिटरिंग कमेटियां गठित कीं। शहर को पांच जोन में बांट कर हर जोन की मॉनिटरिंग कमेटियां गठित की हैं।
इन कमेटियों में स्थानीय लोगों के अलावा दो-दो निगम अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये कमेटियां अपने-अपने इलाकों में अवैध कब्जों पर नजर रखेंगी।
अगर कब्जाधारक विरोध करता है तो कमेटियां संबंधित थानों से मदद लेंगी। बड़ी समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित करेंगी।