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पानीपतः स्ट्रीट लाइट घोटाले में जांच कमेटी ने पेश की रिपोर्ट, दस्तावेजों से फ्लूड लगा की छेड़छाड़

Tue, 17 Dec 2019 02:18 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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घोटाला
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पानीपत नगर निगम में स्ट्रीट लाइटों को लेकर बहुत बड़ा घोटाला हुआ है, जिसका कुछ हद तक जांच कमेटी ने पता लगाकर विधायक, मेयर व पार्षदों के समक्ष तो रखा, लेकिन निगम अधिकारियों ने जांच कमेटी को आवश्यक दस्तावेज न देने की वजह से मामला अधूरा ही रह गया। हालांकि इस जांच में जो भी तथ्य पार्षद दुष्यंत भट्ट एवं जांच कमेटी के अध्यक्ष ने रखे, वे चौका देने वाले रहे। जिसमें एक-एक स्ट्रीट लाइट में 2-2 लाख रुपये तक का अंतर मिला।
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वहीं किसी में 12 हजार तो किसी में साढ़े तीन हजार तक का अंतर भी मिला। इसके साथ शहर की प्राइम लोकेशन समेत अन्य जगहों पर भी जांच कमेटी ने प्राइवेट एजेंसी से जांच करवाई, जिसमें अधिकतर स्ट्रीट लाइटें डुप्लीकेट निकली। वहीं 10 लाख रुपये टेंडर लिमिट वाली कंपनी को 50 लाख रुपये तक के टेंडर दिए मिले। इसके अलावा कई जगह पर पोल लाइट की बजाए पाइप लाइन की पाइपें लगी मिली। जिन्हें कबाड़ की दुकान से खरीदकर पेंट करवाकर लगवाया हुआ था।

इस मामले में दुष्यंत भट्ट समेत अन्य पार्षदों ने भी विधायक व मेयर से स्टेट विजिलेंस जांच की मांग की। वहीं निगम के एमई भूपेंद्र जो पहले जेई थे, के खिलाफ तुंरत प्रभाव से रिकार्ड सील कर सस्पेंड करने का भी प्रस्ताव रखा। जिस पर विधायक ने कहा कि हॉउस हर फैसले का पास करें व उन्हें फॉलो करेंगें। बैठक में एक तरफा दुष्यंत भट्ट स्ट्रीट लाइट घोटाले पर निगम अधिकारियों पर जमकर बरसते रहे, वहीं मेयर चुप्पी साधे नजर आई।
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2 लाख रुपये तक का अंतर, विधायक बोले हैरान हूं, पर हजम नहीं हुई

पार्षद दुष्यंत भट्ट ने बैठक में जांच रिपोर्ट पेश कर बताया कि 12.5 मीटर की टॉवर लाइट को एक तरफ 2 लाख 25 हजार, 2 लाख 50 हजार व 2 लाख 20 हजार में खरीदा जा रहा था, जबकि दूसरी तरफ उसी लाइट को मात्र 49 हजार 300 रुपये में खरीदा गया था। इस तरह दोनो जेई द्वारा अलग-अलग रेट से लाइटें लगवाई जा रही थी, जो एक जैसी थी, जिनमें दो-दो लाख रुपये का अंतर था।

वहीं 32 वॉट की एलईडी लाइट का खर्च अधिकतम 14597 रुपये जबकि न्यूनतम 2401 रुपये दिखाया गया, जिसमें करीब 12 हजार रुपये का अंतर रहा। इसी तरह 7 वॉट की एलईडी के रेटों में भी साढ़े 11 हजार रुपये का अंतर मिला। इस पर विधायक ने कहा कि वे हैरान जरूर हैं, लेकिन ऐसा होना संभव नहीं है। उन्होंने भट्ट को इस मुद्दे की दोबारा जांच करने का आग्रह भी किया।

करते रहे पेमेंट- नहीं दिया रिकार्ड, फ्लूड लगाकर की दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़
दुष्यंत भट्ट ने बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने उन्हें बतौर स्ट्रीट लाइट जांच कमेटी का अध्यक्ष काम करते हुए भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाया। उनके मना करने के बावजूद भी निगम अधिकारी स्ट्रीट लाइटों को पेमेंट ठेकेदारों को करते रहे। जांच कमेटी बनने के बाद निगम ने दो बार ठेकेदारो को पेमेंट कर दी। तीसरी बार जब उन्होंने निगमायुक्त को ई-मेल किया तो इसके बाद ठेकेदारों की पेमेंट पर रोक लगाई गई।

इस प्रकरण में कनिष्ठ अभियंता पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कार्यकारी अभियंता द्वारा जो पत्र सभी अधिकारियों को जारी किया गया था, उसमें संदेह होने पर भूपेंद्र का नाम फलूइड से मिटा दिया गया।जो सरकारी दस्तोवजों के साथ तो छेड़छाड़ करने का अपराध है ही साथ में जांच कमेटी को सहयोग न करने में भी दोषी है।

ब्रांडेड की जगह मिली लोकल लाइटें

जांच कमेटी के अध्यक्ष एवं पार्षद दुष्यंत भट्ट ने बताया कि उन्होंने शहर में लगी स्ट्रीट लाइटों की जांच एक प्राइवेट एजेंसी से करवाई, जिसमें चौकानें वाले खुलासे हुए। शहर में ज्यादातर लाइटें लोकल व घटिया क्वालिटी की लगी थी। इन पर ब्रांडेड कंपनियों को लेवल लगा था। लोकर लाइटों को ब्रांडेड कंपनियों को लेबल चढ़ा लाखों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए हैँ।

वहीं ठेकेदारों ने कबाड़ी की दुकान से पाइप लाइन का पोल लेकर उसे स्ट्रीट लाइट के पोल की जगह लगाया और उस पर पेंट कर दिया। उन्होंने बताया कि उन्हेंं सिर्फ ण्क 2237 स्ट्रीट लाइटों का बिल ब्रांडेड कंपनी का मिला, बाकी नहीं मिले। जांच कमेटी ने शहर की 25 जगहों को चिह्नित कर रिपोर्ट में शामिल किया जहां लोकल लाइटें लगी हुई थी। जिनका अनुमानित खर्च 10 हजार रुपये तक है, लेकिन जिनसे 90 हजार रुपये तक के बिल पास करवाए गए हैं।

10 लाख तक की लिमिट, 50 लाख तक के दिए टेंडर
जांच कमेटी ने बताया कि निगम अधिकारियों ने सिंगल बिड पर तो लाखों करोड़ोँ रुपये के टेंडर देने के साथ एक अजीब फर्जीवाड़ा ओर किया है। उन्होंने आरोप लगाए कि जागलान इलैक्ट्रिकल वर्कस नाम की फर्म की टेंडर लेने की लिमिट केवल 10 लाख रुपये तक की थी, जबकि निगम अधिकारियों ने उन्हें कई टेंडर दिए जोकि सभी 10 लाख रुपये से उपर के थे। इसमें उन्हें अधिकतम सवा 46 लाख रुपये तक के टेंडर अलॉट किए गए हैं, जोकि अपने आप में फर्जीवाड़े को दर्शाता है। इनमें से अधिकतर टेंडरों का भुगतान भी किया जा चुका है।

पांच साल की वारंटी फिर भी मेंटनेंस
जांच कमेटी के अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने बताया कि स्ट्रीट लाइट कंपनियों की वारंटी पांच साल की मिलती है। इसकी कोई जांच पड़ताल भी निगम अधिकारियों द्वारा नहीं की जाती। इसके बाद नकली लाइटों को लगा दिया जाता है, जिनकी थर्ड पार्टी जांच नहीं होती। इसके बाद इन लाइटों में दिक्क्त आने के बाद ठेकेदार को ही इसका मेंटनेंस का काम भी लाखों रुपये में दे दिया जाता है। जबकि वारंटी के दौरान ये काम मुफ्त होना चाहिए। उन्होंने इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निगम अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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विजिलेंस जांच के मुख्य कारण

जांच कमेटी ने स्टेट विजिलेंस जांच के लिए सदन के सामने कई कारण रखे। इनमें जांच के दौरान बगैर समिति विश्वास में लिए आनन-फानन में रोयल ट्रेडर्स को करीब 46 लाख रुपये का भुगतान करना, तत्त्कालीन जेई भूपेंद्र पर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ व बिल का दर्ज होना, अन्य साढ़े 12 लाख का बिल पास करना जिसकी मेल के बाद पेमेंट रोकना, काम पूरा होने व फाईनल पेमेंट क्वालिटी टेस्टिंग के बगैर ही मोटी पेमेंट दे देना, 10 लाख की कंपनी को 50 लाख रुपये तक के कई टेंडर देना, नकली लाइटों के बदले असली लाइटों की पेमेंट करवाना शामिल रहा।

वार्डों में लाइट नहीं, ठेकेदार पेमेंट लेकर चला गया
वार्ड नंबर 3 अंजलि शर्मा ने बताया कि उनके वार्ड में 5 टॉवर लाइटें लगी नहीं कि ठेकेदार पेमेंट लेकर भी निकल गए। वहीं केवल का काम भी नहीं हुआ ओर उसकी भी पेमेंट कर दी गई। इसी तरह 72 व 32 वॉट की लाइटें तक नहीं लगी जब भी ठेकेदार पेमेंट लेकर चला गया।

गरजते रहे दुष्यंत, मेयर ने साधी चुप्पी
दुष्यंत भट्ट की बैठक से कहीं न कहीं मेयर की तल्खी साफ नजर आ रही थी। पूरी बैठक के दौरान दुष्यंत घोटाले की जांच रिपोर्ट को लेकर निगम अधिकारियों, ठेकेदारों व इन्हें सरंक्षण देने वालों पर गरजते दिखाई दिए, वहीं मेयर अवनीत कौर चुपचाप उनकी बातें सुनती रही। उनकी तरफ से इस मामले पर कोई विशेष प्रतिक्रिया नजर नहीं आई।

बता दें कि 16 दिसंबर को नगर निगम पार्षदों को चुने पूरा एक साल हो गया है, वहीं अब तक केवल दो बार ही बैठकें हुई हैं। सोमवार को भी हॉउस की बैठक को बुलाने का निमंत्रण दुष्यंत भट्ट द्वारा दिया गया था, जिसके बाद मेयर ने अपनी बयानबाजी जारी की व पुराना लेटर भी सामने आया। वहीं उन्होंने खुद भी बताया कि दुष्यंत भट्ट की बैठक के चलते उन्होंने हॉउस की बैठक को स्थगित कर दिया है।
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