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चंडीगढ़ निगम की घटिया प्लानिंग प्रोजेक्ट्स पर भारी, करोड़ों का नुकसान

Sat, 07 May 2016 09:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के शॉपिंग कॉम्पलैक्स - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के कई प्रोजेक्ट्स नगर निगम की घटिया प्लानिंग्स की भेंट चढ़ गए हैं। इससे प्रशासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। प्रशासन की ओर से नगर निगम पर लगातार आय के साधन बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम अपनी ही प्रापर्टी से कमाई नहीं बढ़ा पा रहा है। ऐसा नहीं कि नगर निगम के पास ऐसे प्रोजेक्ट नहीं हैं। प्लानिंग कमजोर होने के कारण ही नगर निगम सेक्टर-17 के ओवरब्रिज के नीचे बने शापिंग कांप्लेक्स की शुरुआत पिछले ढाई साल से नहीं कर पा रहा है, जबकि यहां पर 40 दुकानें बनी हुई हैं। यहां पर दुकानों की मांग भी काफी है।
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इन दुकानों को किराए पर चढ़ाकर नगर निगम हर माह 20 से 25 लाख रुपये की कमाई कर सकता है। दुकानों के किराए पर न देने से  निगम को अभी तक 5 से छह करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अगर नगर निगम इन दुकानों को बेच भी दे तो उसे 30 से 40 करोड़ रुपये की कमाई हो जाएगी। ढाई साल से मार्केट शुरू न होने पर दुकानों की हालत भी खस्ता हो गई है। अवैध कब्जा धारकों ने ताले तोड़कर दुकानों पर कब्जा कर लिया है। वे रात में वहां पर सोते भी हैं। दिन में भी कई बार नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग को वहां से सामान मिला है। इसके बावजूद निगम इसकी सुध नहीं ले पा रहा है।

दूसरी और तीसरी मंजिल भी खाली
ब्रिज के ऊपर दूसरी और तीसरी मंजिल भी खाली है जिसे किराए पर चढ़ाने के लिए नगर नगर निगम हाल ही में एक्सप्रेशन आफ इंटरस्ट मंगवाया है। यहां बने दफ्तर भी ढाई साल से खाली हैं। अगर नगर निगम उनको किराए पर चढ़ा दे तो 20 से 25 लाख की कमाई हर माह होगी। वहीं मौलीजागरां की 112 दुकानें भी पालिसी न बनने के कारण अभी तक अलॉट नहीं हुई हैं।
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अधिकारियों पर रिकवरी डाली जाए - बग्गा
मनोनीत पार्षद सुरेंद्र बग्गा का कहना है कि इंजीनियरिंग विंग द्वारा पालिसी न बनाने के कारण अभी तक 150 से ज्यादा दुकाने कई सालों से किराए पर नहीं चढ़ी है। उनका कहना है कि ऐसे में उन अधिकारियों पर रिकवरी डालनी चाहिए जिनके कारण अभी तक लेट लतीफी हुई है। उनका कहना है कि नगर निगम प्लानिंग नाम की कोई चींज नहीं है।

नगर निगम से कई बार मांग की जा चुकी है कि इन खाली दुकानों को नीलाम किया जाए। मार्केट न चलने से एरिया भी विकसित नहीं हो पा रहा है। नगर निगम को प्रोजेक्ट के उद्घाटन की जल्दी होती है तो उन्हें चलाने में भी जल्दबाजी दिखानी चाहिए।
- कमलजीत पंछी, अध्यक्ष, सेक्टर-17  ट्रेडर्स एसोसिएशन

अभी हाल ही में सेक्टर-17-22 के सबवे की एक दर्जन दुकानों को फिर से चढ़ाने का मामला निपटाया गया है। अब ओवरब्रिज के नीचे बनीं दुकानो को नीलाम या किराए पर चढ़ाने का फैसला जल्द लिया जाएगा। इससे नगर निगम की आय भी बढ़ेगी।
- अरुण सूद, मेयर  

अधिकारियों ने हर बार गुमराह किया
जब भी खाली दुकानों की बात सामने आई तो अधिकारियों की ओर से हर बार गुमराह किया गया। अधिकारियों द्वारा कहा गया कि रेट ज्यादा होने के कारण दुकानें किराए पर नहीं चढ़ रही है, जबकि हकीकत यह है कि इंजीनियरिंग विंग की ओर से अभी तक खाली पड़ी दुकानों को अलाट करने की पालिसी नहीं बनी है।
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