नगर निगम सदन ने गरीबों को सस्ते किराए पर मकान देने की योजना को हरी झंडी दे दी है। ग्राम पंचायत की भूमि पर फ्लैट बनाने के लिए नगर निगम चंडीगढ़ प्रशासन को अपना प्रोजेक्ट और एस्टीमेट बनाकर देगा, जहां से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट बनाने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि पिछले साल निगम में 13 गांव शामिल हुए थे। इन गांवों में ग्राम पंचायत की काफी भूमि खाली पड़ी है। मलोया, किशनगढ़ में भी काफी भूमि खाली पड़ी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो प्रक्रिया हैं। एक जहां मकान बने हों और जिन्हें सीधे किराए पर दे दिया जाए। इसके लिए हाउसिंग बोर्ड 2500 मकान लोगों को उपलब्ध करा रहा है।
दूसरा खाली भूमि पर फ्लैट बनाकर गरीबों, मजदूरों या जरूरतमंदों को दे दिया जाए। इसके लिए निगम प्रस्ताव तैयार करेगा। यह प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत तैयार होगा। इसमें कंपनी के साथ 25 साल का अनुबंध किया जाएगा। प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए निगम एक कमेटी बनाएगा।
एडिशनल कमिश्नर-2 कमेटी के चेयरमैन होंगे। इसके अलावा चीफ इंजीनियर, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर बीएंडआर, रोड डिवीजन-2 एक्सईएन, सब डिवीजनल इंजीनियर व मेयर की ओर से नियुक्त दो पार्षद शामिल होंगे। योजना के तहत वन बीएचके और टू बीएचके फ्लैट बनेंगे। वन बीएचके फ्लैट 30 स्क्वायर मीटर जबकि टू बीएचके फ्लैट 60 स्क्वायर मीटर एरिया में बनेगा।
इसमें एक रसोई, बाथरूम, टॉयलेट और 10 स्क्वायर मीटर का डोरमेटरी बेड का एरिया भी होगा। कमिश्नर ने कहा कि मकान को किराए पर लेने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर, सरकारी मानक के अनुसार कम वेतन पाने वाले, मजदूर, प्रवासी मजदूर, शिक्षा से जुड़े कर्मचारी, स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारी, लंबे समय तक चंडीगढ़ में घूमने आने वाले व्यक्ति और छात्र यहां किराए से मकान ले सकते हैं।
सदन की बैठक में सोमवार को तय हो गया कि मृत जानवरों के निस्तारण प्लांट सेक्टर- 25 में ही लगेगा। हालांकि इसके लिए वहां के श्मशानघाट में जगह देखी जाएगी। विरोध के बीच सदन ने यह प्रस्ताव पास कर दिया। सालभर से चले आ रहे इस प्रोजेक्ट पर सदन की हरी झंडी मिलने के बाद कंपनी काम शुरू कर सकेगी।
सदन में जैसे ही यह एजेंडा आया तो शक्ति प्रकाश देवशाली ने कहा कि आखिर यह एजेंडा बार-बार क्यों आ रहा है। कांग्रेस पार्षद शीला देवी व भाजपा पार्षद फर्मिला देवी ने कहा कि प्लांट सेक्टर- 25 में न लगे। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ ने कहा कि डेराबस्सी में इस तरह का प्लांट लगा है। क्यों न पंजाब सरकार से बात कर मरे हुए जानवरों का निस्तारण वहीं कराया जाए।
कमिश्नर केके यादव ने कहा कि वहां की कंपनी हमें कोई प्रपोजल बनाकर दे दे, हम विचार कर लेंगे। काफी देर तक बहस के बाद हीरा नेगी सहित अन्य पार्षदों ने कहा कि मेयर जो तय कर देंगी, वहां प्लांट लगेगा। मेयर राजबाला मलिक ने कहा कि सदन तय करे प्लांट की जगह। कमिश्नर ने कहा कि हम तय नहीं कर सकते तो प्रशासन जहां कहेगा वहां लगा देते हैं प्लांट।
आखिरकार तय हुआ कि सेक्टर- 25 स्थित श्मशानघाट में ही जगह देखी जाए। ज्ञात हो कि इस प्लांट केलिए भाजपा में ही दो गुट बन गए थे। सेक्टर- 25 में प्लांट लगाने के विरोध में पार्षद राजेश कालिया, फार्मिला व शीला देवी ने मोर्चा खोल दिया था, वहीं इंडस्ट्रियल एरिया में प्लांट लगाने के विरोध में पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली, अनिल दुबे, विनोद अग्रवाल, जगतार सिंह ने स्पष्ट मना कर दिया था।
प्लांट के लिए टेंडर काफी समय पहले हो चुका था, जगह निर्धारित न होने से कंपनी काम शुरू नहीं कर पा रही थी।
बैठक में वित्त बढ़ाने को लेकर बनाई गई कमेटी के फैसलों को ही चुनौती दी गई। पक्ष-विपक्ष की संयुक्त कमेटी की सहमति के बावजूद सदन में मतभेद दिखाई दिए। कांग्रेस ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि अगर कोई टैक्स रह गया हो तो वह अगली बैठक में ले आएं। ऐसा कौन सा एजेंडा है, जो आज शहर के विकास के लिए है। कमिश्नर ने कहा कि यह एजेंडा वित्त बढ़ाने वाली कमेटी के सुझाव पर लाया गया है। इस कमेटी में सतीश कैंथ भी शामिल थे। कैंथ ने कहा कि धक्के से कोई टैक्स लगेगा तो सत्तासीन पार्टी का हम कैसे विरोध कर सकते हैं।
ग्रीन टैक्स बाहरी लोगों पर नहीं, हमारे ट्रांसपोर्टरों पर लगेगा। भाजपा पार्षद राजेश कालिया ने कहा कि कौन से काम रुके हैं, बताएं। कमिश्नर ने कहा कि आपने कमेटी की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए हैं और जब विरोध था तो क्यों हस्ताक्षर किए। कालिया ने कहा कि कैंथ हस्ताक्षर करने के बाद अब किसके विरोध में मना कर रहे हैं। रविकांत शर्मा ने कहा कि विरोध था तो हस्ताक्षर के साथ लिखते कि असहमत हूं। जगतार सिंह ने कहा कि किसी ने दबाव बनाया था क्या हस्ताक्षर के लिए। विरोध के कारण अन्य बिन्दुओं पर चर्चा नहीं हो पाई।
अधिकारियों के पेट्रोल-डीजल भत्ते में होगी कटौती
वित्तीय संकट से उबरने के लिए निगम ने मेयर, कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर, चीफ इंजीनियर सहित अन्य अधिकारियों और उनके स्टाफ के साथ अटैच 66 सरकारी गाड़ियों के पेट्रोल-डीजल भत्ते में कटौती की है। एजेंडे के अनुसार इन 66 सरकारी वाहनों के ईंधन पर साल का एक करोड़ का खर्च आता है। 20 प्रतिशत की कटौती का फैसला लागू होने से 20 लाख रुपये बचेगा। इसके साथ नगर निगम ने अब यह भी निर्णय ले लिया है कि भविष्य में कोई नई गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी। अभी निगम की ओर से मेयर को 300 लीटर, कमिश्नर को 250 लीटर, अतिरिक्त कमिश्नर व ज्वाइंट कमिश्नर 225 लीटर और चीफ इंजीनियर को 250 लीटर ईंधन भत्ता मिलता है।