एक पूर्व सचिव और उसके अधीनस्थों की मिलीभगत से बिना अथॉरिटी के 13 आढ़तियों को उनकी फर्म के पार्टनर की वास्तुस्थिति को चेक किए बगैर लाइसेंस इश्यू करने का मामला सामने आया है। चंडीगढ़ प्रशासन की मार्केट कमेटी के इस मामले का खुलासा करीब पंद्रह साल बाद मार्केट कमेटी के एक सचिव ने किया है। अब इस मामले की जांच की जा रही है और इस मामले में कई पूर्व अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं। यह मामला वर्ष 2003 का है।
नियम के अनुसार यदि फर्म या उसके पार्टनर में कोई बदलाव आता है या फिर किसी पार्टनर की मौत हो जाती है तो उसकी जानकारी देने के बाद मार्केटिंग बोर्ड नया लाइसेंस इश्यू करता है। जो मामला सामने आया है उसमें कुछ फर्म में बदलाव आने और फर्म के कुछ पार्टनर के निधन के बाद मार्केट कमेटी के रजिस्टर में फर्म में व्यक्ति का नाम काटकर दूसरा नाम लिखकर लाइसेंस जारी कर दिया गया। वास्तव में नया लाइसेंस मार्केटिंग बोर्ड ही देता है। मंडी में काम करने वाली आढ़तियों की फर्म के बारे में पूरी जानकारी देना मार्केट कमेटी का काम होता है।
आढ़तियों के लाइसेंस को रेन्यू करवाने के लिए भी मार्केट कमेटी को मार्केटिंग बोर्ड को सारी जानकारी देनी होती है जबकि ऐसा नहीं किया गया। वर्ष 2018 में जब यह मामला सामने आया तो उस समय सभी आढ़तियों को बुलाया गया और उनसे जानकारी ली गई। मार्केट कमेटी में बदलाव होता रहा और यहां आने वाले अधिकारी आते जाते रहे पर इसको किसी ने पकड़ा नहीं। नतीजतन आढ़ती करीब पंद्रह वर्ष तक उसी लाइसेंस पर धंधा करते रहे। आढ़तियों को अलाट किए गए इन लाइसेंस के मामले में कई फर्म के ऐसे पार्टनर थे जिनका निधन हो चुका था।
कुछ ऐसे थे जिनके पार्टनरों ने फर्म को छोड़ दिया था। मार्केट कमेटी के रजिस्टर में उस समय के अधिकारियों ने मार्केट कमेटी के रजिस्टर में सिर्फ नाम काटकर अपने स्तर पर लाइसेंस जारी कर दिया।
मामला सामने आने के बाद 8 आढ़ती नया लाइसेंस लेने को राजी हुए
जब यह मामला वर्ष 2018 में मौजूदा सचिव एमके शर्मा के सामने आया तो उन्होंने सचिव मार्केटिंग बोर्ड को इसकी जानकारी दी। उसके आधार पर मार्केटिंग बोर्ड के सचिव ने इस मामले में कथित रूप से संलिप्त पूर्व सचिव और मार्केट कमेटी के अधीनस्थ कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। वर्ष 2003 में मार्केट कमेटी के सचिव पद पर जसपाल सिंह और डीलिंग कर्मचारी राजेंद्र कुमार थे। यह मामला सामने आया तो बोर्ड के सचिव ने लाइसेंस धारकों को सुनवाई के लिए बुलाया। इस मामले के बाद 13 में से आठ आढ़ती नया लाइसेंस लेने के लिए राजी हो गए। उनको नए लाइसेंस बोर्ड की ओर से इश्यू कर दिए गए। इसमें से पांच आढ़तियों ने न डॉक्यूमेंट जमा किए न बैंक गारंटी दी। उन्होंने अपनी अपील सचिव कृषि चंडीगढ़ प्रशासन को दे दी।
बिना लाइसेंस हो रहा है धंधा
मार्केटिंग बोर्ड के नियमों के अनुसार मंडी में आढ़त के लिए लाइसेंस आवश्यक है। इसमें से पांच आढ़ती बिना लाइसेंस के यहां आढ़त का काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में मार्केट कमेटी को सीधा नुकसान हो रहा है। मार्केट कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि मंडी में रोजाना एक आढ़ती के पास करीब पंद्रह लाख रुपये का टर्नओवर होता है।
मार्केट कमेटी से मिले एक रजिस्टर के अनुसार जिन तेरह आढ़तियों के लाइसेंस को इश्यू किया गया उसमें ज्यादातर फर्म के सामने से नाम काटे गए हैं। उसी फर्म के नाम पर लाइसेंस को रेन्यू कर दिया गया है। इस मामले की जांच अभी की जा रही है जल्द ही इस मामले में एक्शन लिया जाएगा।
जब लाइसेंस रेन्यू करने का समय आया तो मैंने सारी हिस्ट्री चेक की और उसी से पता चला कि कई ऐसे मामले हैं। मैंने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी।
- एमके शर्मा, सचिव, मार्केट कमेटी, चंडीगढ़
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है और इसकी जांच की जा रही है।
- नाजुक कुमार, एडमिनिस्ट्रेटर, मार्केट कमेटी