चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक से कमिश्नर केके यादव वॉकआउट कर गए। इसके बाद किसी भी एजेेंडे पर चर्चा नहीं हो सकी। एजेंडे धरे के धरे रह गए। कमिश्नर ने यह वॉकआउट पार्षदों के रवैये परर किया। बुधवार को केवल पिछली बैठक के मिनट्स पर ही चर्चा हो सकी। एजेंडे पर चर्चा शुरू होने से पहले ही माहौल गरमा गया।
नगर निगम कमिश्नर के सदन की बैठक से बाहर जाते ही अधिकारी भी निकल गए। इसके बाद मेयर राजेश कालिया सकते में आ गए। वह अपनी कुर्सी से खड़े होकर इधर-उधर देखने लगे। उनके साथ सदन में उपस्थित पार्षद भी आ गए। इसके बाद सभी लोग सदन से बाहर आ गए। अगली बैठक 11 नवंबर को होगी।
सदन की बैठक में पिछली मीटिंग के मिनट्स पर चर्चा के दौरान कई बार बहस हुई। मिनट्स की अप्रूवल के बाद पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड में विकास के काम नहीं होने पर नगर निगम कमिश्नर से सवाल पूछने शुरू कर दिए। इस पर कमिश्नर सदन से उठकर बाहर चले गए।
सदन की बैठक से बाहर जाने के ठीक बाद कमिश्नर केके यादव ने एडवाइजर मनोज परिदा से मुलाकात की। एडवाइजर ने उनकी बात को सुना और मेयर राजेश कालिया को फोन कर मामले को निपटाने को कहा। उधर, मेयर राजेश कालिया ने कहा कि एडवाइजर का फोन नहीं आया था। यह घर का मामला है। आपसी सहमति से निपटा लिया गया है।
इस तरह बिगड़ी बात
नगर निगम सदन की बैठक में रुके विकास के काम पर चर्चा चल रही थी। भाजपा पार्षद अनिल दुबे ने कमिश्नर से कहा कि आप तो एक बार आईएएस की परीक्षा देते हैं और पदों पर बैठ जाते हैं। हम जनप्रतिनिधि हैं। हर बार परीक्षा देनी पड़ती है। पांच साल में जनता के बीच परीक्षा देने जाना पड़ता है। इससे पहले कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला, उसके बाद अरुण सूद और आशा जसवाल ने मुद्दा उठाया था। उन्होंने भी नगर निगम कमिश्नर और अधिकारियों पर विकास कार्य नहीं होने के आरोप लगाए थे।
अनिल दुबे की बात कमिश्नर को अच्छी नहीं लगी। कमिश्नर ने कहा कि हमारी भी हर फाइल में परीक्षा होती है। विजिलेंस और सीबीआई वाले नगर निगम को नहीं छोड़ते। कमिश्नर ने यह भी कहा कि वे सिफारिश करेंगे कि कमिश्नर का चार्ज किसी पार्षद को दे दिया जाए। कमिश्नर ने कहा कि व्यक्तिगत कटाक्ष बर्दाश्त नहीं होगा। यह कहते हुए डायरी और पेन उठाकर सदन से बाहर चल दिए। उनके चले जाने के बाद सभी अधिकारी भी बाहर निकल पड़े।
कमिश्नर की चेतावनी का असर नहीं
भाजपा पार्षद अनिल दुबे ने नगर निगम कमिश्नर से कहा कि न तो नगर निगम के अधिकारी स्पॉट पर जाकर विकास कार्य को देखते हैं और न ही काम करवाने को कहते हैं। कहा जाता है कि फाइल कमिश्नर के पास है। इस पर कमिश्नर ने कहा कि सदन की मर्यादा का पालन किया जाए, जब मामला नहीं थमा तो वह उठकर चले गए।
सत्ता और विपक्ष ने पूरा साथ निभाया
इस बार विपक्ष भी सत्ता पक्ष के साथ खड़ा दिखाई दिया। अधिकारियों के खिलाफ एक-दूसरे का भरपूर साथ दिया। भाजपा की गुटबाजी ने भी इसे हवा दिया। सदन की बैठक शुरू होते ही पार्षदों ने विकास के काम रुके होने का मुद्दा उठाया और फिर हंगामा शुरू हो गया। नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि वार्ड डेवलपमेंट फंड को खर्च करने का जिम्मा मुख्य अभियंता को सौंपा गया है। हर वार्ड में काम हो रहे हैं।
तीन घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा
बॉयकाट के बाद तीन घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। मेयर और पार्षद एक कमरे से दूसरे कमरे में बैठकें करते रहे। पार्षद कहते रहे कि जब काम नहीं होगा तो अधिकारियों को सुनना ही पड़ेगा। तीन घंटे के बाद जब नगर निगम कमिश्नर केके यादव लौटे तो मनोनीत पार्षद मेजर जनरल एमएस कांडल (रिटायर्ड) ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाया। मेयर के ऑफिस में अनिल दुबे, कमिश्नर केके यादव और नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने बात कर मामले को खत्म करने को कहा।
कमिश्नर ने डेढ़ घंटे किया इंतजार
नगर निगम कमिश्नर अधिकारियों के साथ लंच के लिए चले गए। इसी बीच पार्षद अरुण सूद और आशा जसवाल ने फिर अनिल दुबे को रोककर बैठक करने शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि अब हाउस की बैठक नहीं होगी। मेयर राजेश कालिया अनिल दुबे को साथ लेकर कमिश्नर के साथ लंच टेबल पर बैठे और मनमुटाव खत्म करने की बात होती रही। इसके बाद कमिश्नर केके यादव ने मेयर के कार्यालय में डेढ़ घंटे मीटिंग शुरू होने का इंतजार किया। दोपहर बाद तीन बजे मेयर ने सभी पार्षदों को सदन में बुलाकर हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण बताकर बैठक स्थगित कर दी।