चंडीगढ़। पुटा चुनाव को लेकर आरोपों का दौर खत्म नहीं हो रहा। चुनाव स्थगित होने के बाद मृत्युंजय-नौरा ग्रुप पर अचानक गायब होने के आरोप लगे हैं। खालिद-सिद्धू ग्रुप ने कहा है कि चुनाव स्थगित होने से पहले मृत्युंजय ग्रुप शिक्षकों से मत मांग रहा था लेकिन अब अचानक वे गायब हो गए और शिक्षकों का हाल तक नहीं जान रहे हैं। मृत्युंजय-नौरा की जगह कुछ अन्य पूर्व पदाधिकारी कार्य कर रहे हैं। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो पुटा का संचालन भी पूर्व पदाधिकारियों की ओर से होगा।
खालिद ग्रुप ने आरोप लगाया कि डीसी से चुनाव की अनुमति के लिए पूर्व पदाधिकारियों ने पत्र लिखा। उसी पत्र में चुनाव अधिकारी के हस्ताक्षर थे। यानी तीनों मिलकर हर कार्य एक साथ कर रहे हैं लेकिन दूसरे ग्रुप या शिक्षकों से कोई राय नहीं ली गई। डीसी को तीनों की ओर से उसी तरह पत्र भेजा गया है जैसे कोई एक ही पार्टी के पदाधिकारी अपनी मांग रखने के लिए देते हैं। ऐसे स्थिति में आरओ से कैसे निष्पक्ष चुनाव की आशा की जा सकती है जबकि आरओ को अपने कार्य पर ध्यान देना चाहिए लेकिन सबकुछ मिलकर किया जा रहा है। दूसरे ग्रुप से छिपाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि यदि सुधार नहीं हुआ तो वे आरओ के खिलाफ धरना दे सकते हैं।
आरओ को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए चुनाव की प्रक्रिया को देखना चाहिए लेकिन वह पूर्व पुटा पदाधिकारियों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। मृत्युंजय ग्रुप अचानक गायब हो गया। अगर यह जीतते हैं तो भी यही हाल होगा। संचालन पुटा का कहीं ओर से होगा। -प्रो. मोहम्मद खालिद, अध्यक्ष पद उम्मीदवार
हम कहीं भी गायब नहीं हुए हैं। लोगों के बीच में हैं और उनकी समस्याओं का निस्तारण कर रहे हैं। खालिद ग्रुप की तरह हम बयानबाजी में यकीन नहीं करते। चुनाव की नई तिथि के बारे में मुझे जानकारी नहीं है लेकिन हो सता है कि पुटा सचिव के पास हो। -डॉ. मृत्युंजय कुमार, अध्यक्ष पद उम्मीदवार