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निदा बोले, गजल की कोई परिभाषा नहीं होती है

Wed, 29 Jan 2014 02:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुप्रसिद्ध शायर निदा फाजली ने कहते हैं कि गजल की कोई विशेष भाषा नहीं होती। यह तब भी थी जब हिंदी और उर्दू एक भाषा हुआ करती थीं। इसे हिंदुस्तानी कहा जाता था।
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‘पहले कभी पूछा था जो अब पूछ रही है, दुनिया मेरे लुटने का सबब पूछ रही है...।’ टैगोर में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा में कानपुर से आए हक कानपूरी ने जैसे ही ये कलाम पढ़ा, तो पूरा हॉल दाद और तालियों से गूंज उठा।

डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स, हरियाणा सरकार की ओर से आयोजित इस मुशायरे में देशभर के 15 प्रसिद्ध शायरों ने शिरकत की।

कार्यक्रम में हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी एससी चौधरी मुख्य अतिथि बने। कार्यक्रम की शुरुआत पंचकूला के शम्स तबरेजी के शेयर ‘फकीरी इस कद्र दोस्त हमको रास आई है, शंहशाही भी खुद चलकर हमारे पास आई से हुई, जिसका दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया।
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शायरी की इस महफिल में युवा शायर कय्यूम विसमील ने अपने शेयरों को पेश किया, जिनका केंद्र जिंदगी में फकीरी और मां का प्यार रहा, इसके बाद मुशायरे में दिल्ली की सविता असीम ने दिल्ली में आजकल हो रहे राजनीतिक बदलाव पर अपने भाव पेश किए।

कार्यक्रम में मुंबई से निदा फाजली, कोलकाता से मुनव्वर राना, मेरठ से पापुलर मेरठी, लखनऊ से नसिम निखात, टोंक से टोंकी, मुरादाबाद से कशिश वास्सी, बुराहनपुर से नईंम शादाब, दिल्ली के मुइम शादाब, अन्ना देहलवी और आदिल रसीद ने भी अपने कलाम पढ़े।
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