मुरथल में महिलाओं से कथित गैंगरेप का मामला सरकार के गले की फांस बन गया है। वहीं, यह मामला अब जाट आरक्षण की राह में भी रोड़ा बनता दिख रहा है।
पिछले तीन दिन से जाटों को आरक्षण देने पर कोई काम नहीं हुआ है। सरकार पहले पीड़ितों को मुआवजा देने के अलावा मुरथल में कथित गैंगरेप की स्थिति साफ करने में लगी है। इससे केंद्रीय स्तर पर भी भाजपा की किरकरी हो रही है। वहीं, उपद्रव के बाद जाट मंत्रियों व विधायकों की खिलाफत में उतरे गैर जाट विधायकों का विरोध भी लगातार बढ़ रहा है। भीतरी विरोध ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हाईकमान इसे कंट्रोल करने में लगा है।
गौरतलब है कि उपद्रव के बाद जाटों को आरक्षण देने के लिए केंद्रीय कमेटी गठित की गई थी। सूत्रों की मानें तो कमेटी अपना मसौदा तैयार कर चुकी है। लेकिन फिलहाल आरक्षण की प्रक्रिया पर विराम लगा दिया गया है। सरकार सबसे पहले उनको मुआवजा देना चाहती है, जिनकी दुकानों या अन्य प्रतिष्ठान को उपद्रव के दौरान जलाया गया है। उसके साथ ही मुरथल के कथित गैंगरेप का सच सभी के सामने लाने की भी चुनौती है। सूत्रों के अनुसार केन्द्रीय कमेटी भी फिलहाल आरक्षण को लेकर शांत हो गई है और पिछले कई दिनों से केंद्रीय कमेटी की इस पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।
वर्जन
मुरथल में महिलाओं से गैंगरेप होने की बात केवल कही जा रही है। अभी तक कोई पीड़ित सामने नहीं आने से लग रहा है कि यह पूरी तरह गलत है। इसे राज्य सरकार अपने स्तर पर दिखवा रही है। यह जरूर है कि आरक्षण के मामले में तीन दिन से कोई मीटिंग नहीं हुई है। कई कानूनी पेंच होना भी इसमें थोड़ी देरी की वजह बन रहा है। उनको दूर किया जा रहा है। फिलहाल इतना कह सकता हूं कि आरक्षण जल्द मिल जाएगा।
संजीव बालियान, केंद्रीय राज्यमंत्री और केंद्रीय समिति के सदस्य।