हरियाणा में पिछले महीने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में कथित गैंगरेप केस की सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर कड़ी टिप्पणी की।
जस्टिस एसएस सारों एवं जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच कहा कि बिना एफआईआर कैसी जांच। बेंच ने कहा कि क्या हरियाणा में देश से अलग सीआरपीसी है। दरअसल, सरकारी वकील यही स्पष्ट नहीं कर पाए कि एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई।
प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी के प्रमुख डीआईजी राजश्री ने अदालत में जवाब दाखिल किया कि कोई प्रत्यक्षदर्शी यह कहने को तैयार नहीं है कि गैंगरेप या अश्लील हरकत उसके सामने हुई। एक पीड़िता की शिकायत आई, लेकिन उसने कोई पहचान नहीं दी, ऐसे में दुष्कर्म के आरोप की जांच कैसे की जा सकती है।
हालांकि, यह जरूर माना कि मुरथल ढाबे पर उपद्रवियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। इसी रिपोर्ट पर एमिकस क्यूरी अनुपम गुप्ता ने सवाल उठाया कि मुरथल में कथित गैंगरेप मामले में संवाददाता भी प्रत्यक्षदर्शियों तक पहुंच गए, लेकिन राज्य सरकार उन तक क्यों नहीं पहुंच पाई। खेतों में महिलाओं के मॉडर्न अंत:वस्त्र बिखरे पड़े मिले, लेकिन पुलिस बयान देती रही कि यह कपड़े पुराने हैं।
एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि यह राज्य सरकार की विफलता है कि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे। सरेआम दंगे होते रहे, लेकिन सेना की कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरेआम दुष्कर्म होना और ऊपर से सरकार की ओर से इसे नकारना शर्मनाक है।
उन्होंने यह भी बताया कि पटपड़गंज दिल्ली निवासी बॉबी जोशी प्रत्यक्षदर्शी है, लेकिन पुलिस ने उससे जानकारी नहीं जुटाई। इस पर बेंच ने सरकारी वकील से पूछा कि जब सूचना थी तो दुष्कर्म मामले में एफआईआर क्यों नहीं की। बेंच ने यह भी पूछा कि विशेष जांच टीम का काम सबूत जुटाना है, लेकिन यहां टीम सूचना जुटाती रही।