इस बार नगर निगम चुनाव के दौरान नोटबंदी का मुद्दा भी अहम रहेगा। चंडीगढ़ के मतदाताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने का फैसला कितना भाया, यह भी निगम चुनाव के परिणाम स्पष्ट कर देंगे। इसलिए विकास और आरोपों के बीच इस बार चुनाव में नोटबंदी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरेगा। कांग्रेस, भाजपा के साथ बसपा भी इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उछाल कर वोट बटोरने का प्रयास करेगी। कांग्रेस और भाजपा ने इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
कांग्रेस जहां 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने से लोगों को हो मुश्किलों को मजबूती से उठाएगी। वहीं, कारोबार मंदा पड़ने का मामला उजागर करके प्रापर्टी डीलर्स, आभूषण विक्रेताओं, हर वर्ग के व्यापारियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी। जबकि भाजपा ने नोटबंदी को काला धन पर लगाम लगाने की बात मतदाताओं के सामने रखेगी। भाजपा की ओर से नोटबंदी के कारण दूरदर्शी परिणामों को लोगों को बताएगी।
भाजपा का दावा है कि लाइन में खड़े होने के बावजूद शहरवासी प्रधानमंत्री के इस फैसले से खुश हैं। जबकि बसपा की ओर से यह कहा जा रहा है कि नोटबंदी पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीति कर रही है ।
कांग्रेस नोटबंदी के कारण आ रही परेशानियों को उठाएगी
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कारोबार हो रहा प्रभावित
500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने से शहर में व्यापार प्रभावित हो रहा है। मोटी रकम लोगों के पास न होने के कारण ज्वेलरी शॉप में बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है। जबकि प्रापर्टी बाजार में सन्नाटा छा गया है। शादियों का सीजन होने के बावजूद कपड़े का कारोबार 40 प्रतिशत ही रह गया है।
इसके साथ ही लोगों को बैंक में राशि जमा करवाने और नोट बदलवाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। नोट बदलने की राशि दो हजार करने से भी दिक्कत बढ़ गई है। 18 दिसंबर को निगम चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए एक दिसंबर से प्रचार शुरू हो जाएगा। ऐसे में चुनाव पर बैंकों की स्थिति का भी असर पड़ेगा। मंडी में किसान फसल नहीं ला रहे हैं। अधिकतर आढ़तियों ने कारोबार भी बंद कर दिया है, जो कर भी रहे हैं वह उधार में।
चुनाव प्रचार पर भी असर
500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने का असर चुनाव प्रचार पर भी पड़ेगा। इससे जहां कुछ उम्मीदवारों का खर्चा कम होगा। वहीं, कुछ उम्मीदवार अपने पास रखे 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बांटने का प्रयास भी करेंगे। जबकि उम्मीदवारों को डोनेशन भी कम मिलने की उम्मीद है।
भाजपा इस फैसले से भविष्य में होने वाले फायदे को बताएगी
pradeep chabra and sanjay tandon
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नोटबंदी के कारण बेटियों की शादियां नहीं हो रही है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। छोटे उद्योगों से कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। ऐसे में शहरवासी किस तरह से भाजपा को माफ कर पाएंगे। लोगों को काम काज छोड़कर घंटाें लाइन में गुजारना पड़ रहा है। नगर निगम चुनाव में नोटबंदी के कारण आ रही परेशानियों को उठाया जाएगा।
प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष।
नोटबंदी के फैसले से शहरवासी खुश हैं। लोगों को भी पता है कि यह थोड़े समय की परेशानी है उसके बाद मध्य वर्ग और गरीब लोगों को ही फायदा मिलेगा। नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, शहर के लोग यह बात जानते हैं। शहर के मतदाता कांग्रेस के दुष्प्रचार के प्रभाव में आने वाले नहीं है। नोटबंदी से सिर्फ कांग्रेस के नेता परेशान हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह क्यों काला धन के समर्थन में हैं।
संजय टंडन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जादूगर की तरह नोट बंद करने का फैसला ले लिया, लेकिन लोगों की परेशानी की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। जन धन योजना के तहत खोले गए बैंक खातों पर वाहवाही लूटने वाली सरकार अब कह रही है कि इनका गलत प्रयोग हो रहा है। भाजपा निगम चुनाव हार चुकी है।
पवन बंसल, पूर्व रेल मंत्री।