निकाय चुनाव के परिणाम हरियाणा की राजनीति में कई मायनों में अहम होंगे। अब सभी दलों की नजरें 22 जून को आने वाले नतीजों पर टिकी रहेंगी। वर्ष 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले निकाय चुनाव में शहरी मतदाताओं का रुख लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा है। मात्र फरीदाबाद को छोड़कर एक साथ 21 जिलों के मतदाता शहर की सरकार को लेकर अपना जनादेश देंगे। शहरी मतदाताओं का रुख ही राजनीतिक दलों के लिए 2024 की रणनीति तय करेंगे।
हरियाणा में 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल ही में राज्यसभा चुनाव में भाजपा-जजपा और निर्दलीय विधायक कांग्रेस को मात दे चुके हैं। निकाय चुनाव से पहले सभी दलों ने शहरी मतदाताओं पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए जोर लगाया है। साथ ही सभी दलों ने विकास के दावों के साथ साथ कई लुभावने वादे भी किए हैं। शहरी मतदाताओं को वैसे तो भाजपा का परंपरागत मत माना जाता है लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इसमें सेंध लगाई है।
भाजपा-जजपा ने गठबंधन के तहत पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा है, जबकि कांग्रेस ने सिंबल पर न लड़कर जिताऊ निर्दलीयों को अपना समर्थन दिया है। इनेलो और आप भी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रही हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा-जजपा गठबंधन के उम्मीदवारों और निर्दलीयों के बीच माना जा रहा है। कुछ जगह ही इनेलो और आप प्रत्याशी टक्कर देते नजर आ रहे हैं।
अब इन नतीजों के बाद साफ हो जाएगा कि शहरी क्षेत्रों में किस दल की स्थिति कितनी मजबूत और कमजोर है। इन्हीं परिणाम के बाद सभी दल अपनी अपनी रणनीति में बदलाव कर आगे की तैयारी करेंगे, क्योंकि आगामी कुछ ही माह में पंचायत और फरीदाबाद नगर निगम समेत शेष निकाय संस्थाओं में भी चुनाव होने हैं। हालांकि, पंचायत चुनाव पार्टियां सिंबल पर नहीं लड़ती, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनावी भी काफी अहम माने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले सभी दलों को शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सियासी जमीन का आंकलन हो जाएगा और इसी के आधार पर दल भविष्य की रणनीति तय करेंगे।