चंडीगढ़। नगर निगम सदन में मंगलवार को करीब चार घंटे हंगामा चला। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों को मार्शल बुलाकर सदन से बाहर कर दिया गया। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता, आप पार्षद प्रेम लता और कांग्रेस पार्षद सचिन गालव को विरोध करने और एजेंडे की प्रति फाड़ने पर सस्पेंड करते हुए सदन से बाहर निकाल दिया। विपक्ष का आरोप है कि मेयर ने मार्शल और पुलिस की जगह गुंडे बुलाए। कई लोग नगर निगम से संबंधित कोई कागजात भी साथ नहीं लाए थे। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक सदन की कार्रवाई हंगामा और बहिष्कार में रही। यह लगातार दूसरी बार है जब सदन से बाहर को मार्शल के जरिये बाहर निकाला गया। इससे पहले अगस्त महीने में आप के चार पार्षदों को बाहर कर दिया गया था।
सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। मेयर ने पिछले हाउस के मिनट्स पास करने का प्रस्ताव रखा, जिसे कांग्रेस और आप पार्षदों ने चुनौती दी। उनका आरोप था कि मिनट्स में फैक्ट गलत लिखे गए हैं। विपक्ष का कहना था कि कई पार्षद एजेंडों के समय सदन में मौजूद नहीं थे, बावजूद इसके यह दिखाया गया कि सभी मौजूद थे। आप और कांग्रेस के पार्षदों ने वीडियो दिखाया जिसमें भाजपा पार्षद वेल में मौजूद थे जबकि आप के पार्षद वी-3 सड़क के मुद्दे पर वोटिंग कराने के लिए अपनी सीट पर खड़े थे। वीडियो दिखाने के बाद सदन में नारेबाजी और एजेंडों की फाड़ने का काम शुरू हो गया। मेयर ने इसके बाद मार्शल बुलाकर चारों पार्षदों को बाहर करने का प्रयास किया लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। इस पर मेयर ने सदन की कार्रवाई रोक दी।
10 मिनट की जगह दो घंटे का ब्रेक
मेयर ने सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए रोकी लेकिन यह ब्रेक करीब दो घंटे तक चली। फायर कर्मचारियों और मार्शल की मदद से पार्षदों को बाहर किया गया। इस दौरान आप पार्षद प्रेमलता के पैर में चोट लग गई। आम आदमी पार्टी के पार्षद रामचंद्र यादव और अन्य पार्षदों को भी बाहर किया गया। पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी, योगेश ढींगरा समेत विपक्ष ने इसे तानाशाही फैसला करार दिया। बाद में चार लोगों को छोड़कर अन्य पार्षदों को सदन में लौटने की अनुमति दी गई। सदन से बाहर होने के बाद चारों पार्षद दर्शक दीघा में बैठकर मेयर के विरोध में बैनर दिखाने लगे। मेयर ने जब सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए ठप की, तब भी विपक्ष के पार्षद सदन में बैठे रहे। कुछ देर बाद आप और कांग्रेस के पार्षदों ने अपनी तरफ से प्रतीकात्मक हाउस शुरू किया। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर बंटी को अपना मेयर मानकर एजेंडों पर चर्चा की। इस दौरान सदन ने मेयर और भाजपा के मुद्दों का मजाक उड़ाया और विरोध दर्ज कराया।
मार्शल की जगह गुंडे बुलाने का आरोप
कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी और डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने आरोप लगाया कि सदन में तैनात मार्शल दरअसल भाजपा के गुंडे थे, जिन्हें पार्षदों पर हमला करने के लिए बुलाया गया। गाबी ने कहा कि जब उन्होंने नकली मार्शलों को पकड़ा तो वे मुंह छिपाकर भागने लगे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हीं को पकड़ने की कोशिश की। गाबी ने चेतावनी दी कि यदि किसी पार्षद को चोट या जान का खतरा होता तो इसकी जिम्मेदारी मेयर, कमिश्नर और निगम सचिव पर होती। विपक्ष ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
यहां से शुरू हुआ विवाद
सदन में विवाद की शुरुआत मेयर के रूस दौरे और वहां मिले सम्मान पर बधाई देने से हुई। भाजपा ने इसे चंडीगढ़ के लिए गर्व बताया जबकि विपक्ष ने इसे झूठा दिखावा और कर्मचारियों की अनदेखी करार दिया। विपक्ष ने पिछले दिनों सेक्टर 22 मार्केट में गंदगी फैलाने वाले इंस्पेक्टरों को बहाल करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इसके पीछे बड़े अफसर का भी हाथ है। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि विपक्ष चंडीगढ़ को आगे बढ़ता नहीं देखना चाहता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने उनके मिले सम्मान के ऊपर एजेंडा फाड़ फेंका और सदन में व्यवस्था बाधित करने का प्रयास किया।