चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस की पीसीआर व्यवस्था कागजों में मजबूत दिखाई देती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। शहर में कुल 63 पीसीआर गाड़ियों की मंजूरी है लेकिन वास्तविकता में 45 से ज्यादा सड़क पर नजर नहीं आतीं। 18 से 20 गाड़ियां ऑफ रोड हैं। कुछ गाड़ियां अधिकारियों के घरों के बाहर और वीआईपी ड्यूटी में फिक्स कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक हादसों और अपराध की सूचना पर पीसीआर को 5 से 6 मिनट में पहुंचना होता है लेकिन गाड़ियों की कमी के चलते कई बार दूसरे थाने से गाड़ियां बुलानी पड़ती हैं। इससे मौके पर देरी से पहुंचने की समस्या बढ़ रही है। पूर्व डीजीपी तेजिंदर सिंह लूथरा ने आदेश दिए थे कि पीसीआर गाड़ियां वीआईपी ड्यूटी में नहीं भेजी जाएंगी। ऐसे में वीआईपी ड्यूटी में लगाने से सवाल उठा रहे हैं। सूत्रों ने खुलासा किया कि कई बार पीसीआर इंचार्ज ऑनलाइन सिस्टम पर स्पॉट एक्सेप्ट करने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही रीच बटन दबा देते हैं ताकि रिकॉर्ड में समय पर पहुंचने का दिखावा हो सके। सूत्रों ने बताया कि कई वर्षों से शहर में 43 से 46 के बीच ही गाडियां चल रही हैं जबकि अन्य गाड़ियां ऑफ रोड चल रही हैं।
पीसीआर में घायल के लिए स्ट्रेचर भी नहीं
कई गाड़ियां खस्ताहाल हालत में हैं। सेक्टर 26 थाने के तहत चल रही एक वैन को धक्का मारकर स्टार्ट करना पड़ता है। किसी भी पीसीआर गाड़ी में स्ट्रेचर या घायल को लिटाने की सही व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल ले जाने में परेशानी आती है। सूत्रों ने बताया कि हर माह एक गाड़ी के हिसाब से 250 लीटर तेल मिलता है।
पीसीआर में पहले ही गाडियों की कमी
कुछ समय पहले पीसीआर को 25 नई आर्टिगा गाड़ियां मिलीं थीं जिन्हें प्रशासक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इनमें से कई गाड़ियां अधिकारियों को दे दी गईं जबकि पीसीआर में पहले ही गाड़ियों की भारी कमी है। रोजाना पीसीआर गाड़ियों की एंट्री रोस्टर में होती है। औसतन 44 से 45 गाड़ियां ही सड़कों पर चल रही हैं। धीरे-धीरे ऑफ रोड गाड़ियों की एंट्री भी रोस्टर से हटाई जाने लगी है।
15 साल पहले थीं 63 गाड़ियां, अब कम
करीब 15 साल पहले शहर में 63 गाड़ियां सक्रिय थीं। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक पीसीआर के साथ चीता बाइक भी चलती थी। अब दो महीने से शहर में चीता बाइकें लगभग बंद हैं। सिर्फ सेक्टर 47 में एक बाइक फिक्स है। जबकि आबादी बढ़ने के बावजूद गाड़ियों की संख्या कम हो गई है।
किस थाने में कितनी गाड़ियां
सेक्टर 17 थाना : 4 गाड़ियां, जिनमें से 2 ऑफ रोड और 1 वीआईपी ड्यूटी में सिर्फ 1 गाड़ी चल रही।
इंडस्ट्रियल एरिया थाना : 4 गाड़ियां, 2 ऑफ रोड
सेक्टर 31 थाना : 6 गाड़ियां, सिर्फ 4 चल रहीं
सेक्टर 39 थाना : 5 गाड़ियां, 3 चल रहीं
आईटी पार्क थाना : 2 गाड़ियां, 1 चल रही
मनीमाजरा थाना : 3 गाड़ियां, 2 चल रहीं
सेक्टर 3 थाना : 5 गाड़ियां, 1 ऑफ रोड, 1 वीआईपी ड्यूटी पर
सेक्टर 11 थाना : 3 गाड़ियां, 1 ऑफ रोड
सेक्टर 26 थाना : 6 गाड़ियां, सिर्फ 3 चल रहीं
पहले 3 मुलाजिम, अब 2
पहले पीसीआर गाड़ी पर तीन पुलिसकर्मी होते थे जिनमें एक हथियारबंद रहता था। अब ड्राइवर और इंचार्ज ही तैनात रहते हैं। रात को ही तीन मुलाजिम लगाए जाते हैं। सवाल है कि अचानक हमले की स्थिति में क्या दो लोग सुरक्षा संभाल पाएंगे। शाम के समय हादसे और झगड़े के मामले ज्यादा आते हैं। गाड़ियों की कमी के चलते कॉलोनियों में पीसीआर समय पर नहीं पहुंच पाती।