फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं नगर निगमों के चुनाव

विज्ञापन
विज्ञापन
कानूनन 9 नगर निगम अभी भी हैं नगर परिषद
विज्ञापन

निगम का दर्जा देने के लिए कानून में करना होगा बदला


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में दो चरणों में होने वाले निकाय चुनाव कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। मानेसर नगर निगम में न्यूनतम तीन लाख की आबादी की अनिवार्यता के विपरीत 1.60 लाख की आबादी होने से जहां इस निगम के अस्तित्व पर कानूनी संकट बरकरार है। वहीं, फरीदाबाद को छोड़कर बाकी 9 जिला मुख्यालयों पर स्थापित नगर निगमों को कानूनी दृष्टि से अभी तक नगर निगम का दर्जा नहीं मिल पाया है। ऐसे में कानूनी रूप से चुनावों में अड़चनें आने की आशंका बढ़ती जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बीते सवा चार साल से यह सभी नौ नगर निगम कानूनन नगर परिषद हैं, जिन्हें नगर निगम के रूप में नामित करने के लिए कानून में बदलाव जरूरी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट व कानूनी विशेषज्ञ हेमंत कुमार के अनुसार, निगमों को दर्जा नहीं मिलने का कारण 2020 में कानूनी संशोधन के दौरान गड़बड़ी है। हरियाणा म्यूनिसिपल कानून की धारा 2(1) के अनुसार, हर जिला मुख्यालय पर स्थापित निकाय नगर परिषद होगी, उसकी जनसंख्या कितनी भी रहे। 19 सिंतबर 2020 से हरियाणा नगर पालिका (संशोधन) कानून 2020 लागू हुआ था। वहीं, इसी तरह, नगर निगम अंबाला और सोनीपत की स्थिति है। जहां के मेयर विधायक बन चुके हैं। उनके विधायक बनने के बाद खाली हुई मेयर सीटों पर उपचुनाव कराने के लिए कानून में संशोधन जरूरी है। नगर निगम कानून की मौजूदा धारा 13 के अनुसार, मेयर का उपचुनाव संभव नहीं है। हालांकि, निवार्चन नियमों में ऐसी रोक नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अभिनेता शाहरूख खान के साथ खड़ा अंबाला का वैभव अरोड़ा:

अभिनेता शाहरूख खान के साथ खड़ा अंबाला का वैभव अरोड़ा:

अभिनेता शाहरूख खान के साथ खड़ा अंबाला का वैभव अरोड़ा:

अभिनेता शाहरूख खान के साथ खड़ा अंबाला का वैभव अरोड़ा:

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें