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मल्टी एयर टैरिफ पर 15 दिन में मांगे सुझाव

Fri, 13 Dec 2013 04:53 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिश्नर ने मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) पर अपने सुझाव देने के लिए जनता को 15 दिन का और समय दिया है। सेक्टर-10 स्थित म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी ऑडिटोरियम में पब्लिक हियरिंग गई।
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इसमें पहुंचे सभी लोगों का कहना था कि उन्हें एमवाईटी की रेगुलेशंस के बारे में जानकारी ही नहीं है और न ही विभाग ने कुछ बताया।

पब्लिक हियरिंग के लिए पहुंचे जेईआरसी के सदस्य एसके चतुर्वेदी ने कहा कि सभी लोग एमवाईटी की बुकलेट को पढ़कर 15 दिन बाद अपने ऑब्जेक्शंस और सुझाव जेईआरसी को जमा करवाएं।

उन्होंने कहा कि एमवाईटी जनता की सुविधाओं के लिए शुरू किया जा रहा है। इसमें यह प्रावधान किया जाएगा कि बिजली विभाग अपने विभागीय नुकसानों का बोझ जनता पर न पड़ने दे। अगर किसी भी तरह का नुकसान होगा तो उसके लिए विभाग खुद जिम्मेवार होगा।
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तीन साल के लिए होगा एमवाईटी
जेईआरसी ने स्पष्ट कर दिया है मल्टी ईयर टैरिफ को तीन सालों के लिए तैयार किया जाएगा। इसमें तीन सालों का इकट्टा टैरिफ प्लान, नुकसान कम करने के तरीके और पावर पर्चेज आदि के बारे में पूरी डिटेल जानकारी होगी।

जेईआरसी ने यूटी बिजली विभाग को 30 अगस्त तक डिटेल रिपोर्ट तैयार कर जेईआरसी को सब्मिट करने के आदेश भी दिए हैं।

एफपीपीसीए का जताया विरोध
पब्लिक हियरिंग में पहुंचे ज्यादातर लोगों ने फ्यूल पावर पर्चेज कोस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए)और एडिशनल सिक्योरिटी चार्जेज का विरोध जताया।

पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि जिन लोगों ने ये चार्ज दिए हैं, उन्हें रिफंड किए जाएं और जिनके पेंडिंग हैं उन्हें कैंसिल किया जाए।

चंडीगढ़ चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियलिस्ट के गुरिंदर सिंह ने कहा कि जिस समय कनेक्शन लगवाया था तब सिक्योरिटी भी जमा करवाई थी।

अब बिजली विभाग एडवांस कंजप्शन डिपॉजिट (एसीडी)के रूप में अब फिर हमसे पैसे वसूल रहा है। फॉसवेक के चेयरमैन पीसी सांघी ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा।

1965 के खंबे और तारें बिछी हैं शहर में
रूपी सिंह ने कहा कि शहर में 1965 में लगाए गए बिजली के खंबे और तारें हैं। बिजली पर हो रहे अतिरिक्त खर्चे का भार पब्लिक पर ही पड़ रहा है जबकि ऐसा सिर्फ विभाग की लापरवाही से ही हुआ है।

उन्होंने पुरानी वायरिंग को बदलना चाहिए और सड़कों पर एलईडी लाइटें लगनी चाहिए। रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन आरसी गोयल ने एसीडी के लिए आठ महीने का और समय दिए जाने की मांग उठाई। जब तक मार्केट में प्रीपेड मीटर न आएं तब तक विभाग लोगों से एसीडी चार्जेस न वसूले।
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