इन फसलों में है एमएसपी व्यवस्था
वर्तमान में 23 प्रमुख फसलों को एमएसपी की व्यवस्था में शामिल किया गया है। इनमें गेहूं, चावल, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी के साथ ही पांच तरह की दालों और 8 किस्म के तेल बीज, कच्चा कपास व जूट, गन्ना और वीएफसी तंबाकू शामिल हैं। देश के लगभग 9.0 करोड़ टन अनाज भंडारण में भी एमएसपी को बड़ा कारण माना जाता है।
सीएसीपी तय करता है एमएसपी
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) एमएसपी के अंतर्गत आने वाली फसलों की कीमतें तय करता है। वर्ष 1965 में हरित क्रांति के समय एमएसपी की घोषणा की गई थी। वर्ष 1966-67 में गेहूं की खरीद के साथ इसकी शुरुआत हुई।
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एमएसपी मिलने का क्या है दायरा
एमएसपी का लाभ उन्हीं किसानों को मिल पाता है जिनके पास औसतन 5 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि होती है। हरियाणा और पंजाब के किसानों में ऐसे किसानों की संख्या काफी अधिक है। इन दोनों राज्यों सहित देश के अन्य राज्यों में 86 प्रतिशत ऐसे किसान हैं जिनके पास औसतन 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। कई किसानों के पास कृषि भूमि ही नहीं है। ऐसे में वह एमएसपी के दायरे से बाहर हो जाते हैं और उन्हें इसका लाभ ही नहीं मिल पाता है।
किसानों की धुरी है एमएसपी। इसके कारण ही किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल पाता है, यदि उन्हें एमएसपी का लाभ ही नहीं मिलेगा तो वह बर्बाद हो जाएंगे। केंद्र सरकार जब तक तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी या वापस नहीं लेगी उनकी लड़ाई जारी रहेगी। - सुखदेव सिंह कोकरी कलां, राष्ट्रीय महासचिव, भाकियू, एकता (उगराहां)
एमएसपी किसानों के बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्था है। पंजाब-हरियाणा को छोड़कर देश के 71 प्रतिशत किसानों को एमएसपी का अर्थ ही नहीं पता है। सरकार ने कभी यह प्रयास भी नहीं किया कि देश के अन्य किसानों को इस व्यवस्था से अवगत कराया जाए। - दविंदर शर्मा, कृषि मामलों के जानकार, मोहाली।