चाहे कार हो या फिर इलेक्ट्रानिक आइटम। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड तो लगते हैं इंडिया सर्किट्स लिमिटेड के। हरेक डिवाइस के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड वास्तव में बेस होते हैं और यह सर्किट पंचकूला में लाए हरियाणा के एक साधारण से नौकरी पेशा परिवार के रजनीश कुमार गर्ग।
कुरुक्षेत्र में पढ़ाई के बाद रजनीश गर्ग ने आईआईटी नई दिल्ली से एमटेक किया और फिर रिसर्च के बाद अपने टेस्ट को देखते हुए शुरू की इलेक्ट्रानिक्स इंडस्ट्री। रजनीश ने जब फैक्ट्री शुरू की तो छोटे स्तर पर इलेक्ट्रानिक्स की कलपुर्जे बनाते थे। वह हमेशा इकोनामी के साथ चले।
पंचकूला में उन्होंने वर्ष 1990 में अपनी फैक्ट्री लगाई और बरवाला में एकदम इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की फैक्ट्री लगाई वर्ष 2010 में। जब उन्होंने प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाने का काम शुरू किया तो उस समय देश में उत्पादन करीब दस हजार करोड़ रुपये का था, जो कि वर्ष 2020 में 27 सौ हजार करोड़ रुपये का होने की संभावना है। इस इंडस्ट्री में ग्रोथ इतनी ज्यादा है कि कभी परेशानी नहीं हुई।
मेक इन इंडिया का सपना
रजनीश गर्ग ने बताया कि जिस समय उन्होंने काम शुरू किया उस समय काफी इंपोर्ट होता था, अब कोशिश यह की जा रही है कि यह कलपुर्जा देश के बाहर न जाए। उन्होंने बताया कि प्रिंटेड सर्किट बेस कंपोनेंट है। इसमें सभी आईसी सर्किट और कंपोनेंट लगते हैं। इंडिया सर्किट्स लिमिटेड अब देश की शीर्ष दस कंपनियों में है।
यहां से मारुति, होंडा, हुंडई, फिलिप्स, ओसम, हैवेल्स एवरेडी, ल्युमिनिस, भारती टेलीकॉम और सैमसंग, एलजी जैसी कंपनियों को सर्विस देती है। आईसीएल में सबसे ज्यादा प्रकार के पीसीबी बनते हैं। इनमें सिंगल साइडेड, डबल साइडेड, एमसीपीसीबी, गोल्ड प्लेटिंग और कार्बन के संग बनाए जाते हैं।
दस से बारह घंटे करता था काम
रजनीश गर्ग ने कहा कि यह सारा काम इतना आसान नहीं था। हर चीज चाहिए, बिजली, स्किल्ड लेबर और फाइनेंस जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह दस से बारह घंटे रोजाना काम करते हैं। इसके साथ ही वह रविवार को भी काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके काम में उनकी पत्नी ने काफी सहयोग दिया।
अभी भी चल रही है रिसर्च
रजनीश गर्ग ने बताया कि उनको पढ़ाई के साथ हमेशा से लगाव रहा है। इसी कारण अभी भी वह अमेठी यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर प्रिंटेड सर्किट पर रिसर्च कर रहे हैं। इस रिसर्च के लिए भारत सरकार ने 65 लाख की ग्रांट दी है। रजनीश कुमार गर्ग ने बताया कि इसके साथ ही कई रिसर्च प्रोजेक्ट भी पाइप लाइन में हैं। अपनी इंडस्ट्री के परिवारों को भी वह पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहते हैं।
क्रिएटिव बनाया बेटियों को
रजनीश कुमार गर्ग ने बताया कि उनके दो लड़कियां हैं। बड़ी लड़की नूरा है और छोटी जायशा। रजनीश गर्ग ने बताया कि नूरा ने कानून की पढ़ाई की। नूरा में क्रिएटिविटी है और उसी वजह से कानून की पढ़ाई की करने के बावजूद उन्होंने अपने प्रोफेशन को क्रिएटिविटी से जोड़ दिया। एक मेकअप आर्टिस्ट के रूप में खुद की पहचान बनाने के लिए नूरा ने यूके से मेकअप आर्टिस्ट का कोर्स किया। छोटी बेटी जायशा अब इकनामिक्स की पढ़ाई कर रही है।
ट्रेनिंग देते हैं कर्मचारियों को
रजनीश कुमार गर्ग ने बताया कि वह वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में युवाओं को ट्रेनिंग भी देते हैं। इस ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को इंडस्ट्री के बारे में बताया जाता है। रजनीश गर्ग ने बताया कि वोकेशनल ट्रेनिंग के साथ वह युवाओं को इंडस्ट्री के बारे मे भी जानकारी प्रदान करते हैं। यही नहीं, ट्रेंड करने के बाद युवाओं को पंचकूला और आसपास की इंडस्ट्री में जॉब भी लगवाते हैं।
प्रोफाइल
रजनीश कुमार गर्ग
डायरेक्टर
इंडिया सर्किट्स लिमिटेड
एमटेक-आईआईटी नई दिल्ली
रोटरी क्लब पंचकूला के पूर्व प्रधान और सदस्य।
कई स्कूलों की एडवाइजरी कमेटी के सदस्य
डीईआई स्टडी सेंटर (एक वोकेशनल ट्रेनिंग स्कूल) के केंद्र निर्देशक।
रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और नागिरक कार्य में सक्रिय
वर्ष 2015 में हरियाणा सरकार ने किया सम्मानित
वर्ष 2011 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा मिला सम्मान
युवाओं के लिए टिप्स
1-अपने कार्य के लिए पूरी तरह निष्ठावान हों।
2-कभी छोटे सुख की ओर ज्यादा ध्यान न दें।
3-अपने विचारों को बड़ा रखें, काम पर ध्यान दें।
4-सच्चाई और इमानदारी ही आपको आगे ले जाएगी।
5-बिजनेस शुरू करने के पहले सर्वे जरूर करें।