करीब सात साल तक पेपर ट्रेडिंग। जब कामर्शियल प्रिंटिंग पैकेजिंग में आए तो सामने चुनौतियां कम नहीं थी, लेकिन बड़े भाई के साथ परिवार का साथ मिला और क्वालिटी पर फोकस कर पूरी लगन के साथ काम करने के बाद की गई मेहनत रंग लाई और आज न केवल पंचकूला बल्कि नार्थ इंडिया में इनकी कामर्शियल प्रिंटिंग पैकेजिंग की धाक है। यह है पंचकूला कैपको प्रिंटर्स के डायरेक्टर अमित कपूर और वरुण कपूर के उद्यमी बनने की कहानी।
ग्रेजुएशन के बाद पेपर ट्रेडिंग से शुरुआत
कैपको प्रिंटर्स के डायरेक्टर अमित कपूर ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद बड़े भाई वरुण कपूर के साथ पांचवीं जनरेशन के रूप में पेपर ट्रेडिंग में आए और करीब सात साल तक काम किया। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य पहले से ही पेपर ट्रेडिंग का काम कर रहे थे। रामलाल कपूर एंड सन्स और कपूर ट्रेडिंग कारपोरेशन बतौर पार्टनरशिप फर्म चंडीगढ़ में और इसके अलावा दिल्ली, अमृतसर और लुधियाना में पेपर ट्रेडिंग का काम कर रहे थे। ऐसे में उनकी रुचि भी पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे परिवार के काम को आगे ले जाने की थी।
पार्टनरशिप फर्म से ऑफशूट कर प्रिंटिंग में आए
कैपको प्रिंटर्स के डायरेक्टर वरूण कपूर ने बताया कि पेपर की बैकग्राउंड जानकारी मजबूत होने के कारण और पार्टनरशिप फर्म के काम को आगे ले जाने के लिए उन्होंने वर्ष 1998 में पंचकूला में कंपलीट प्रिंटिंग सोल्यूशन के लिए प्रिंटिंग यूनिट लगाई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने 10 कर्मचारियों और सिंगल कलर मशीन के साथ काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके सामने कई चुनौतियां थी, लेकिन उन्होंने चुनौतियों का सामाना किया। प्रिंटिंग क्वालिटी पर फोकस करने की वजह से उनका काम चल निकला और उन्होंने करते करते डबल कलर मशीन से सिक्स कलर मशीन लगा डाली।
वर्ष 2002 में की ब्लीस्टर पैकेजिंग की शुरुआत
अमित कपूर ने बताया कि बिजनेस के विस्तार के लिए उन्होंने वर्ष 2000 में स्पोर्ट्स मैगजीन और टूथब्रश की पैकेजिंग शुरू की। शुरुआत में मुंबई बेस्ट कंपनी के टूथब्रश के लिए विंडो लेमिनेशन शुरू की। इसके बाद वर्ष 2002 में ब्लीस्टर सीलिंग एंड पैकेजिंग करना भी शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में मोहाली में स्पाइस टेलीकॉम के आने के बाद टेलीकॉम प्रिंटिंग करना भी चालू किया। उन्होंने बताया कि क्लाइंट के प्रोडक्ट को अपना समझकर डिजाइन प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग के साथ भी उन्हें बेहतर तरीके से गाइड भी करने लगे। जिसके बाद उनके काम ने मार्केट में रफ्तार पकड़ी।
बद्दी में लगाई कॉर्टन फॉर्मेशन मेकिंग फैक्ट्री
वरुण कपूर ने बताया कि डिमांड के अनुसार उन्होंने बद्दी में किराये पर जगह लेकर वर्ष 2010 में कॉर्टन फॉर्मेशन मेकिंग फैक्ट्री लगाई और पोस्ट प्रेस की सुविधा में सुधार किया और प्रिंटिंग को यूनिक शेप देने के लिए कई मशीनें भी लगाईं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने पार्कर पैन की भी प्रिंटिंग की। टॉप ऐड एजेंसी के साथ काम कर चुके अमित और वरुण ने बताया कि उनकी प्रिंटिंग की खासियत ये है कि वे स्पेशल पैंटोन कलर चलाते हैं, जो कि आसानी से कापी नहीं किए जा सकते।
इन जगहों पर जाता है प्रिंटिंग मैटेरियल
- ट्राइसिटी, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल
- एजुकेशन, फार्मा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए करते हैं प्रिंटिंग
ये करते हैं मल्टीकलर शीटफैड ऑफसेट प्रिंटिंग
- कैटलॉग्स
- मोनोकॉर्टन
- डैगलर
- ब्लीस्टर
- पैंफलेट्स
- ब्रोशर्स
- कैलेंडर
यहां लगा दी दो यूनिट
- कैपको प्रिंटर्स, पंचकूला इंडस्ट्रीयल एरिया, फेज-दो (1998)
- कॉटर्नस, बद्दी, पंचकूला (2010)
क्षमता- करीब एक लाख से ज्यादा शीट्स प्रिंटिंग (एक दिन में)
प्रोफाइल
कंपनी- कैपको प्रिंटर्स
अमित कपूर, डायरेक्टर
स्कूलिंग- सेंट जॉन्स स्कूल, सेक्टर-26, चंडीगढ़ (1987)
ग्रेजुएशन- थापर इंस्टीट्यूट, पटियाला (1993)
एग्जीक्यूटिव मैंबर- पंचकूला इंडस्ट्री एसोसिएशन
प्रोफाइल
कंपनी- कैपको प्रिंटर्स
वरुण कपूर, डायरेक्टर
स्कूलिंग- सेंट फ्रांसिस स्कूल, अमृतसर (1985)
ग्रेजुएशन- डीएवी कॉलेज, अमृतसर (1989)
पीआरओ- पंचकूला इंडस्ट्री एसोसिएशन
टिप्स
- किसी भी क्षेत्र में जाने से पहले जानकारी हासिल करें
- किसी भी काम को मेहनत और लगन के साथ करें
- किसी भी काम में टीम वर्क का होना भी जरूरी