घर में पकवान बनाना हो या कारपोरेट्स के लिए फर्नीचर डिजाइन करना.....पंचकूला की श्वेता गुलाटी के लिए दोनों काम एकसमान हैं। पंचकूला स्थिति दादा ब्वायज की प्रोपराइटर श्वेता ही ऐसी महिला इंडस्ट्रियलिस्ट हैं जिनके हुनर के दीवाने बड़े बड़े कारपोरेट्स हैं। श्वेता ने तो कभी सोचा तक नहीं था कि वह एक इंडस्ट्रियलिस्ट बनेंगी।
वक्त ने ऐसी करवट ली कि श्वेता खुद इंडस्ट्रियलिस्ट बनी ही साथ ही जोड़ लीं ऐसी अशिक्षित महिलाएं जो काम करना चाहती थीं। श्वेता ने बताया कि वह सहरानपुर के एक परिवार से हैं। पापा का साड़ी का कारोबार था, मां गृहणी। घर में उनका काम एजूकेशन और खाना बनाने तक ही सीमित था।
एजूकेशन पूरी करने के बाद उनकी शादी कुरुक्षेत्र के एक परिवार में हो गई। इस परिवार का अपना फर्नीचर का काम था। वर्ष 1997 में उनकी शादी हुई। शादी के बाद बच्चे हुए। पति ने एक दिन कहा कि अब कंपनी में कामकाज संभालो। श्वेता ने बताया कि पति ने जब ऐसा कहा तो उनकी फर्नीचर इंडस्ट्री में गईं।
क्रिएटिव होने के कारण उनको कुछ नया करना चाहती थीं। वर्ष 2007 में दादा ब्वायज की स्थापना की गई। श्वेता के लिए मुश्किल था कि उनको स्कूटर और कार आदि चलाना नहीं आता था। ऐसी स्थिति में उन्होंने अपने पति से कार चलाना सीखा। श्वेता बताती हैं कि कंपनी के प्रोडक्शन से लेकर सप्लाई चेन तक वही देखती हैं।
महिलाओं को बनाया अपनी ताकत
श्वेता ने बताया कि अब काम करना आसान है लेकिन काम करवाना मुश्किल। उन्होंने महिला वर्करों की टीम डवलप की, इनको वेल्डिंग, पेस्टिंग और पालिश आदि में माहिर किया और नतीजा यह हुआ कि जो दूसरों के घरों में चौका बर्तन करने वाली महिलाएं थीं वह भी उनके साथ जुड़ गईं। श्वेता अब करीब दो सौ वर्करों का स्टाफ मैनेज करती हैं।
बेटे और बेटियों को भी देखती हैं
श्वेता ने बताया कि उनका ज्यादातर समय इंडस्ट्री में गुजरता है। इसलिए टाइम टेबल बनाया है। सुबह दस बजे तक घर में रहती हैं और बेटे तावीश, बेटी कोलांबी और पंखुड़ी को समय देती हैं। श्वेता ने बताया कि खुद भी उन्होंने एमए इकोनामिक्स से किया है और इसीलिए अपने बच्चों को भी ज्यादा से ज्यादा एजूकेशन देना चाहती हैं।