पंचकूला के अशोक गर्ग कभी पंजाब प्लानिंग बोर्ड में रिसर्च अफसर थे, लेकिन नौकरी छोड़ कर इन्होंने श्रीराम ग्लास अंडर प्लाईवुड इंडस्ट्री लगाई और नाम कमाया। कस्टमराइज्ड फर्नीचर बनाने वाली उनकी कंपनी के चर्चे आज ट्राईसिटी ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब हैं।
वर्ष 1997 में छोटी सी पूंजी और दो कर्मचारियों के सहयोग से जब उन्होंने प्लाईवुड ट्रेडिंग में कदम रखा तो सामने चुनौतियां कई थीं। ऐसे में उन्होंने चुनौतियों से मुंह नहीं मोड़ा और उनका डटकर सामना किया। इसी बीच उनके छोटे भाई राकेश गर्ग भी हरियाणा आर्किटेक्चर विभाग में नौकरी छोड़कर प्लाईवुड ट्रेडिंग में आ गए और बिजनेस में सहयोग देने लगे।
वर्ष 2011 में कंपनी में मैनपॉवर की ज्यादा जरूरत के मद्देनजर अशोक गर्ग ने सरकारी नौकरी छोड़कर पूरा ध्यान बिजनेस पर ही लगा दिया। लोगों की मांग को भांपते हुए उन्होंने फर्नीचर बनाने का काम शुरू कर दिया। दोनों भाइयों की कड़ी मेहनत और लगन के साथ पिता देसराज के सहयोग से बिजनेस को आगे बढ़ाया।
इसी बीच उन्होंने फरीदाबाद, गुड़गांव सहित कई अन्य जगहों पर डिस्टेंट एजुस्टेट प्रोग्राम के लिए साउंड प्रूफ रिकार्डिंग स्टूडियों भी बनाने शुरू किए। अब तक कई साउंड प्रूफ रिकॉर्डिंग स्टूडियों बना चुके हैं।
अपने बेहतर क्वालिटी के फर्नीचर से पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली में धाक जमाने के बाद उनके फर्नीचर की डिमांग विदेशों तक पहुंच गई। वर्ष 2013 में कनाडा से उन्हें पहला ऑर्डर मिला। उसके बाद से ही अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देशों को भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे अब तक 40 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।