सात सौ कर्मचारियों और सालाना 200 करोड़ के टर्नओवर के साथ करनाल का बेरी उद्योग 75 देशों में एक खास पहचान बनाए हुए है। सेक्टर तीन में बेरी उद्योग का आधुनिक कृषि उपकरण प्लांट है। पर्यावरण को साफ और स्वच्छ रखने के लिए यहां पर करीब एक एकड़ में पेड़ पौधे लगाए गए हैं और एक पार्क भी है।
एचएसआईआईडीसी के अंतर्गत सौ से ज्यादा यूनिट हैं, पर इतने पेड़ पौधे अन्य में नहीं हैं। बेरी उद्योग के एमडी रवि बेरी का कहना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ पौधे लगाने जरूरी हैं। हमने प्लांट के अंदर ऐसे पौधे लगाए हैं जो आक्सीजन ज्यादा छोड़ते हैं और प्रदूषण से बचाते हैं।
सात सौ कर्मचारी, 200 करोड़ का टर्नओवर
बेरी उद्योग का कारोबार दुनिया के 75 देशों में है। इन देशों में बेरी उद्योग के ब्रांड फील्डकिंग नाम से ही बिकते हैं। कृषि यंत्रों में आज बेरी उद्योग का नाम गुजरात के शक्तिमान कृषि उद्योग के बाद लिया जाता है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ऑउट स्टैंडिंग परफार्मेंस के लिए बेरी उद्योग को बेस्ट इंडस्ट्रीज प्राइज के लिए नोमिनेट किया गया है।
बेरी उद्योग के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि बेरी ने बताया कि उद्योग की शुरुआत वर्ष 1978 में हांसी रोड से बेरी वेल्डिंग वर्कशॉप से हुई थी। इस वर्कशॉप की शुरुआत हिसार के सरकारी पशुधन फार्म से मैकेनिकल इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त उनके पिता इंजीनियर प्रकाशचंद बेरी ने की थी। आज उद्योग का 200 करोड़ का टर्नओवर है।