फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बर्तन से शुरुआत, अब बनाते हैं करंसी और सेना की बुलेट

Sun, 17 Jan 2016 10:04 PM IST
अमित विश्वकर्मा/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
विज्ञापन
विज्ञापन
बर्तन बनाने के पुश्तैनी काम से राधेश्याम गुप्ता आज सेना की बुलेट से लेकर भारतीय मुद्रा के पांच के सिक्के बनाते हैं। कई देशों को भी उनकी मुद्रा के लिए मेटल शीट सप्लाई करते हैं।
विज्ञापन


लगभग दो सौ साल पहले उनके पुर्खों ने बर्तन बनाने का काम शुरू किया था,जो भारत को आजादी मिलने तक चलता रहा। जैसे ही 1947 में देश आजाद हुआ उन्होंने तीन लाख की लागत से छोटी सी यूनिट लगाई।

इसके बाद 1990 में लोस में चल रही एक यूनिट को खरीदा। तब से लेकर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विज्ञापन

मुश्किलों से भरा सफर लेकिन नहीं छोड़ा हौसला

राधे श्याम गुप्ता बताते हैं पहले लोग पीतल व कांसे के बर्तनों का उपयोग बहुत ज्यादा करते थे और पूरे देश में इनकी मांग थी। मगर बाद में जापनी स्टेनलेस स्टील आई और इस उद्योग की कमर टूटने लगी।

उद्योग को बचाने के लिए तकनीकि मदद जरूरी थी। साथ ही क्वालिटी मेंटेन करना भी। इसलिए उन्होंने मेटल शीट का कारोबार शुरू किया। अपनी क्वालिटी की वजह से देश में ही नहीं, विदेशों में भी इसकी अच्छी मांग है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें