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Chandigarh News: मनीमाजरा में 24 घंटे पानी परियोजना की जांच के लिए सांसद ने कैग को लिखा पत्र

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तिवारी ने मनीमाजरा पायलट प्रोजेक्ट की नाकामी पर उठाए सवाल, कहा- जनता का पैसा गया बेकार
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सीएजी के. संजय मूर्ति को पत्र लिखकर स्मार्ट सिटी वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट का परफॉर्मेंस ऑडिट कराने की मांग की

माई सिटी रिपोर्टरचंडीगढ़। शहर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मनीमाजरा में चल रही 24 घंटे पानी पायलट परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तिवारी ने कैग के. संजय मूर्ति को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट की नाकामी की जांच के लिए विस्तृत परफॉर्मेंस ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह योजना जनता के पैसों से बनी लेकिन अपने उद्देश्य पूरे करने में पूरी तरह विफल रही है।

तिवारी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट जनता के पैसे से और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से चलाया गया लेकिन सफल नहीं हुआ। इससे वित्तीय पारदर्शिता, कार्यान्वयन क्षमता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठे हैं। तिवारी ने पत्र में लिखा कि 2015 में शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन का लोगों की जिंदगी को आसान बनाने वाले प्रोजेक्ट को लागू करना था। इसके तहत चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 24 घंटे पानी परियोजना सौंपी गई जिसकी कुल लागत 591.57 करोड़ तय की गई थी। परियोजना पूरी होने पर चंडीगढ़ देश का पहला शहर बनना था जहां 24 घंटे स्वच्छ पानी उपलब्ध होता लेकिन मनीमाजरा का पायलट प्रोजेक्ट 166.06 करोड़ खर्च होने के बावजूद पूरी तरह असफल रहा। मनीमाजरा में किसी भी इलाके में अच्छे प्रेशर से पानी नहीं मिल रहा है। उल्टा लोगों ने गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतें की हैं। स्मार्ट मीटर भी खराब पड़े हैं। लोगों को केवल 2-4 घंटे ही पानी मिल रहा है।
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विजिलेंस जांच में निगम ने सौंपे अधूरे दस्तावेज

तिवारी ने पत्र में लिखा है कि निगम अब पूरे शहर की परियोजना को रद्द करने पर विचार कर रही है क्योंकि यह आर्थिक रूप से अव्यवहारिक साबित हो रही है। 412 करोड़ का लोन ब्याज और महंगाई के कारण लगभग दोगुना हो जाएगा जिससे पानी के दाम भी दोगुने करने पड़ सकते हैं। साथ ही डीपीआर में सड़क रिकार्पेटिंग जैसे खर्चों का जिक्र तक नहीं है जिससे खर्च और बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद यूटी विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू की लेकिन निगम ने अधूरे दस्तावेज ही सौंपे। तिवारी ने कहा कि मीडिया में भी आया कि जांच को प्रभावित करने की कोशिशें भी हुईं। अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी से पानी की गुणवत्ता या सेवा स्तर का ऑडिट नहीं हुआ।
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स्वतंत्र जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है : तिवारी

तिवारी ने कैग से अनुरोध किया है कि वह परियोजना की कुल लागत और फंडिंग स्रोतों की पुष्टि, वित्तीय संरचना, ठेकेदार चयन और फंड आवंटन में प्रक्रियागत अनुपालन, नगर निगम और स्मार्ट सिटी द्वारा फंड प्रबंधन, तकनीकी कार्यान्वयन और तय लक्ष्यों की तुलना, डीपीआर की उपयुक्तता और खर्च के मुकाबले वास्तविक लाभ का मूल्यांकन का विस्तृत परफॉर्मेंस ऑडिट किया जाए। तिवारी ने कहा कि यह परियोजना न केवल करोड़ों के सार्वजनिक धन से जुड़ी है बल्कि चंडीगढ़ के नागरिकों की मूलभूत सुविधा से सीधे संबंधित है। इसलिए स्वतंत्र जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
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