अनुपम खेर एक कार्यक्रम के सिलसिले में चंडीगढ़ आए तो यहां उन्होंने अपनी निजी और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़े कई राज साझा किए। अनुपम खेर बताते हैं कि मेरी जिंदगी की फिलॉसफी इसी में है कि जिंदगी में कभी भी कुछ भी हो सकता है।
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ऐसा नहीं है कि जो हमने सोचा हो वो ही हमारे साथ हो कई बार जो हमने सोचा भी नहीं होता है वो भी हमारे साथ हो जाता है। बीए में मेरे 38 प्रतिशत नंबर आए थे। इसके बाद मैं एमए करना चाहता था 27 जुलाई 1974 को मैं शिमला से पीयू आ गया और थिएटर से जुड़ा।
कभी सोचा भी नहीं था कि बीए में 38 प्रतिशत लाने वाला इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट से गोल्ड मेडल लेकर निकलेगा। उन्होंने कहा कि आज मैं जिस मुकाम पर हूं वो बलवंत गार्गी जी की वजह से ही है।
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उनसे मुझे एक्टिंग, पेंटिंग, साहित्य सब कुछ सीखने को मिला। मैंने डेढ़ साल उनके घर पर रहकर जिंदगी के बारे में, थिएटर के बारे में और सिनेमा के बारे में इतना कुछ सीखा कि मैं अपने आप को उस डेढ़ साल के नजरिए से अपने आप को धनी समझता हूं।
मां के मंदिर से 100 रुपये चुराकर दिया था ऑडिशन
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में अनुपम खेर
अनुपम बताते हैं कि उनको दोस्त ने बताया कि पीयू में इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट में ऑडिशन है और सेलेक्ट होने वाले को 200 रुपए भी मिलेंगे तो मैंने सोचा क्यों न मुझे भी जाना चाहिए, लेकिन घर के हालात इतने ठीक नहीं थे।
मेरे पास बस में जाने का किराया नहीं था तो मां के मंदिर से 100 रुपये चुराकर चंडीगढ़ आया। ऑडिशन में मैंने कुछ अलग किया ताकि मैं सेलेक्ट हो जाऊं। लेकिन जब ऑडिशन खत्म होने के बाद गार्गी जी ने बहुत मुँह बनाया मैंने सोचा इनका नेचर ही ऐसा होगा।
मुझे लगा खुश होंगे मेरे अलग करने पर लेकिन उन्होंने मुझे कहा वैरी बेड। बस इसके बाद मैं घर चला गया और वहां जाकर देखा तो मां ने पुलिस बुलाई थी 100 रुपये चोरी होने के कारण।
कुछ समय बीत जाने पर पापा ने मुझसे पूछा की उस दिन तुम कहां गए थे और मैंने सब बता दिया। पापा ने मां को कहा अनुपम को 200 रुपये मिलेंगे। उनमें से 100 रुपये जो चुराया है उसमें से ले लेना।
अभी भी नर्वस होता हूं किरण जी के सामने
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में अनुपम खेर
अनुपम स्टेज पर थे तो बीच में उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी तो कहने लगे की आज भी मैं किरण जी के सामने आता हूं तो मैं नर्वस हो जाता हूँ। वैसे जब भी किरण स्टेज पर होती है तो मैं स्टेज के नीचे ही होता हूँ। पंजाब यूनिवर्सिटी एलुमिनी मीट के दूसरे सेशन में पद्म भूषण अनुपम खेर और सांसद किरण खेर ने अपनी जिदंगी से जुड़ी कुछ बातों को साझा किया।
बलवंत गार्गी के बारे में बात करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने बलवंत गार्गी से यह सीखा कि इंसान को कभी भी जिंदगी में सीरियस नहीं होना चाहिए। जिंदगी को एक कॉमेडी की तरह जीना चाहिए। सांसद किरण खेर ने चंडीगढ़ की खूबसूरती के बारे में बात करते हुए बताया कि चंडीगढ़ खूबसूरत तो है ही साथ ही में यहां पर ट्रैफिक की समस्या मुंबई से बहुत कम है। मुंबई में अब बहुत ज्यादा भीड़ हो गई है।
मुंबई से चंडीगढ़ बसने का विचार 7 साल पहले ही आ गया था। यहां पर आकर मुझे शांति मिलती है और लगता है कि अपने घर वापस आ गई हूं। वही अनुपम खेर ने शिमला में रहने की इच्छा जताई। सांसद किरण खेर ने पार्लियामेंट पर बोलते हुए कहा कि यह एक ऐसा मंच है यहाँ पर किसी भी तरह का कोई भेद भाव नहीं होता। यहाँ साधारण इंसान को भी आवाज मिलती है। संसद एक ऐसी जगह है जहां पर डिबेट की जा सकती है, विचार रखे जा सकते है और यहीं पर कानून बनते हैं।
‘अकेलेपन’ पर पति पत्नी के विचार अलग थे। अनुपम खेर ने इस पर बोलते हुए कहा कि उनकी जिंदगी में अकेले रहने का कोई कांसेप्ट है ही नहीं। उन्हें लोगों से मिलना अच्छा लगता है और यह आदत उनमें उनके पिता से पैदा हुई। जबकि किरण खेर ने अकेले रहने की इच्छा जताई।
सफलता और असफलता के सवाल पर जवाब देते हुए अनुपम खेर ने कहा कि इंसान को कभी असफलता से घबराना नहीं चाहिए। एक इवेंट फेल हो सकता है, लेकिन इंसान नहीं। असफलता का खौफ कल्पना के जैसा होता है। असफलता ही इंसान की सफलता की पहली सीढ़ी होती है।
इन्हें किया गया सम्मानित
पद्म भूषण बीएन गोस्वामी, पद्म श्री प्रो. नीलम मान सिंह और स्वर्गीय कश्मीरी लाल जाकिर और राजपाल सिंह, मेयर अरुण सूद, प्रो. एसवी केसर, प्रो. वीरेंद्र कुमार, प्रो. वीरेंद्र मेंहदीरत्ता, प्रो. राणी बलबीर कौर, प्रो. सुदेश कौर खंडूजा, प्रो. महेंद्र कुमार, प्रो. एसपी गौतम, डॉ. अशोक चितकारा, डॉ. पीजे सिंह, संजीव अग्रवाल, राजीव रिऋि और एससी कोहली को सम्मानित किया गया।