पाई। कठवाड़ गांव में बुधवार को तीन साल पहले विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतेह कर भारत का झंडा बुलंद करने वाली सुनीता के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया।
ग्राम पंचायत व डेरा बाबा बिहारी दास कठवाड़ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रेवाड़ी जिले के गांव गुज्जर माजरी निवासी जौहरी सिंह की बेटी सुनीता ने बताया कि 20 मई 2011 को उसने एवरेस्ट की चोटी को फतेह करके तिरंगा लहराया था।
इस यात्रा पर कुल 32 लाख रुपये खर्च हुए थे, उसके पिता ने ब्याज पर ऋण लेकर उसे पैसा दिया था, जो आज तक भी चुकता नहीं हुआ। उसके ग्रुप में 28 सदस्य थे।
प्रदेश सरकार ने नहीं की मदद
सुुनीता ने बताया कि चोटी फतेह करने के बाद वह एक जून को अपने गांव पहुंची तो उसका खूब मान सम्मान हुआ, परंतु अफसोस है कि देश व प्रदेश सरकार किसी ने भी उसकी कोई खबर नहीं ली। न तो किसी छोटे बड़े कार्यक्रम में सम्मानित किया और न ही आर्थिक मदद के अलावा कोई सरकारी नौकरी की पेशकश हुई। उसके साथ जो पानीपत निवासी एक युवती थी। उसे सरकार ने पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति दी है। लेकिन उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रुप में सबसे कम उम्र की पर्वतारोही थीं
सुनीता ने बताया कि वह अपने ग्रुप में सबसे कम उम्र की सदस्य थीं। वह खुद को प्रदेश सरकार द्वारा ठगा महसूस कर रही है। डेरे के महंत त्रिवेणी दास ने बताया कि उन्होंने सुनीता के साहस को देखते हुए उसे सम्मानित करने का निर्णय लिया। बुधवार को सम्मान समारोह में सुनीता को ग्राम पंचायत की ओर से 5100 रुपये, डिप्टी राजपाल की ओर से 5100 रुपये, इनेलो के जिलाध्यक्ष कैलाश भगत ने 11000 रुपये, हजकां के राव सुरेंद्र सिंह ने 11000 रुपये और विक्रम सीवन ने 5100 रुपये दिए।