अगर आप माउंट एवरेस्ट को फतेह करने का तरीका जानना चाहते हैं तो यह किताब जरूर पढ़ें। इसमें एक पर्वतारोही की सफलता की कहानी है। पंजाबी में प्रकाशित एवरेस्ट 1996 किताब की सफलता के बाद आईटीबीपी के कमांडेंट (सेवानिवृत्त) मोहिंदर सिंह ने उसका हिंदी वर्जन ‘1996 में एवरेस्ट की जीत की गौरवमयी गाथा’ को प्रकाशित किया है।
पुस्तक का विमोचन शुक्रवार को आईपीएस अरविंद कुमार ने आईटीबीपी के ट्रांसपोर्ट बटालियन बहलाना कैंप में किया। किताब में 1996 में माउंट एवरेस्ट पर हासिल की गई जीत की गौरवमयी गाथा को रोमांचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। एवरेस्ट पर फतह 1953 से 13 अलग -अलग तय रास्तों से की गई है। पर सबसे दुर्गम और कठिन रास्ता नॉर्थ कॉलम-तिब्बत (चीन) से है।
किताब में नॉर्थ कॉलम से एवरेस्ट तक के पहले भारतीय अभियान के 78 दिनों की रोमांचक गाथा बहुत ही बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है। किताब में रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव, बार-बार मिलने वाली चुनौतियां, कई बार सामने दिख रही हार, मुश्किल लक्ष्य, कठिन रास्ते, पूरी तरह से बंद लगने वाले रास्ते, दर्द और तीन साथियों की दर्दनाक मौत, थकान और बैचेनी, हादसे और अन्य सभी मुश्किलों के बाद मिलने वाली जीत में भी खुशियां, उदासी और आनंद के पलों को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
किताब एक ऐतिहासिक उपलब्धि टीम के शिखर पर पहुंच जाने के वर्णन के साथ समाप्त होती है। लेकिन तब तक टीम के 3 सदस्य अपनी जान गवां चुके होते हैं । इन लोगों की भयंकर बर्फीले तूफान में फंस जाने से मौत होती है। मोहिंदर सिंह पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक चिर-परिचित नाम है। पर्वतारोही पुरस्कार से सम्मानित मोहिंदर सिंह पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस में 35 वर्ष की सेवा के उपरांत कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए।