सोनिया सुबह आठ बजे ड्यूटी पर जाती हैं। इस दौरान उनकी बेटी की देखभाल कभी सास- ससुर तो कभी पति करते हैं। उन्होंने कहा कि करीब 12 घंटे के ड्यूटी के बाद जब घर लौटती हैं तो कोरोना के प्रकोप के चलते बेटी के पास जाने में भी हिचकिचाहट होती है। कई बार बेटी कहती है कि मम्मा आप हरदम ड्यूटी पर रहती हो। पुलिस की नौकरी में सबसे बड़ा चैलेंज अपने बच्चों की परवरिश ही है।
दूसरी तरफ पुलिस की ड्यूटी भी जरूरी है, बेटी को समय देने में परेशानी होती है लेकिन यह मां के ऊपर होता है, कि वे कम समय में भी छोटी-छोटी खुशियों को कैसे समेटे। कई बार ऐसा होता है कि बेटी बीमार होती है और वह अपनी डयूटी पर फर्ज निभा रही होती हैं।
फर्ज और ममता की मिसाल हैं कांस्टेबल ऋतु खरब
यूटी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात ऋतु खरब फर्ज और ममता की मिसाल हैं। एक तरफ कोरोना काल में करीब 12 घंटे ड्यूटी कर रही हैं, वही अपने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए गांव भेज दिया है। वह वीडियो कॉल पर बात कर अपने बच्चों का हालचाल लेती हैं।
उन्होंने बताया कि उनका छह साल का बेटा मिलन पंघाल और तीन साल की बेटी शानवी है। बेटा केजी और बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। कोरोना के बढ़ते केस की वजह से लॉकडाउन में सुबह 8 से रात 8 बजे तक ड्यूटी कर रही हैं। इस दौरान कई बार दोनों बच्चों को उनके पति देखभाल करते हैं लेकिन वह भी अक्सर ड्यूटी पर चले जाते हैं। ऐसे में बच्चों को घर में अकेला रहना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी फर्ज को मां की ममता के आड़े आने नहीं दिया।
उनका कहना कि इस संकट की घड़ी में ड्यूटी करना पहली प्राथमिकता है। पुलिस की वर्दी इसलिए पहनी है, क्योंकि हमें जनता की सुरक्षा करनी है और कोरोना आपदा में इस वक्त जनता को सबसे ज्यादा जरूरत पुलिस की है। कोरोना के बढ़ते केस की वजह से खुद को बच्चों से दूर कर उन्हें गांव भेज दिया है।