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हाईकोर्ट ने कहा: मां के चरित्र पर निराधार आरोप लगा कर उसे बच्चे की परवरिश के अयोग्य नहीं माना जा सकता

Thu, 03 Jun 2021 02:44 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि मां अकेली रहती है और पिता परिवार के साथ, यह मां को बच्चे की कस्टडी न देने का आधार नहीं है। ऐसे कई उदाहरण है जब अकेले अभिभावक के पास पले बच्चों ने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बच्ची की कस्टडी से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि मां के चरित्र पर निराधार आरोप लगाकर उसे बच्चे की परवरिश के लिए अयोग्य मानने का आधार नहीं हो सकता है। याचिका दाखिल करते हुए महिला ने बताया कि उनका विवाह लुधियाना में 2013 में हुआ था। 

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याची का पति भारतीय नागरिक था जो बाद में ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता ले चुका है। इस बीच उसने याची को ऑस्ट्रेलिया बुलाया और दोनों को वहां की नागरिकता मिल गई। दोनों की एक बच्ची हुई और कुछ समय तक सब ठीक चला। इसके बाद दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे और तलाक की याचिका ऑस्ट्रेलिया की कोर्ट में दाखिल की गई। 

याचिका के मुताबिक दोनों के बीच समझौता हुआ और वह फिर से साथ रहने लगे। इसके बाद जनवरी 2020 में दोनों भारत आए और इस दौरान याची अपने मायके फतेहगढ़ चली गई। इसका फायदा उठाकर पति ने बच्ची को लौटाने से इनकार कर दिया और खुद को असुरक्षित पाकर याची ऑस्ट्रेलिया चली गई। वहां की कोर्ट में कस्टडी से जुड़ा केस फाइल किया तो कोर्ट ने पिता को आदेश दिया कि वह बच्ची को लौटा दे। कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर वारंट भी जारी किया।
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बच्ची के पिता ने कहा कि याची का उसकी बहन के पति से अवैध संबंध था। इसी के चलते उसने याची को ऑस्ट्रेलिया बुलाया था ताकि उसकी बहन का घर बर्बाद न हो। वैसे भी याची ऑस्ट्रेलिया में अकेली रहती है जबकि यहां पर बच्ची दादा-दादी और अपने पिता के साथ रह रही है। 

हाईकोर्ट ने कहा कि याची के अवैध संबंध से जुड़ा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है। याची पर इस प्रकार के निराधार आरोप लगाते हुए उसे बच्चे की परवरिश के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता। साथ ही यह भी कहा कि यदि याची अकेली रहती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह परवरिश सही प्रकार से नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें अकेले अभिभावक के साथ बड़े हुए बच्चों ने राष्ट्र निर्माण में अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

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