फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जुलाई 2024 तक पीयू वीसी की कुर्सी पर विराजमान रहेंगे प्रो. राजकुमार

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजकुमार का कार्यकाल उपराष्ट्रपति एवं कुलाधिपति वेंकैया नायडू ने तीन साल के लिए बढ़ा दिया है। इसका गजट जारी हो गया है। वीसी जुलाई 2024 तक इस पद पर बने रहेंगे। हाल ही में अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी कि सभी वीसी का कार्यकाल बढ़ने का गजट मार्च में जारी हो जाता है, लेकिन प्रो. राजकुमार का कार्यकाल अभी तक नहीं बढ़ा।
विज्ञापन

पीएचडी इंक्रीमेंट दिलाकर शिक्षकों से लूटी थी वाहवाही
पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने 22 जुलाई 2018 को यहां कार्यभार ग्रहण किया था। जैसे ही कार्यभार ग्रहण किया तो उनका विरोध हुआ, लेकिन वह विरोध के बीच डटे रहे। एक साल तक पीयू की बारीकियों को जाना। संचालन के लिए बनी सिंडिकेट व सीनेट को देखा और समझा। शुरुआती दिनों में सिंडिकेट व सीनेट की बैठक के दौरान तमाम प्रस्तावों पर सदस्यों के साथ उनकी बहस हुई। वीसी कुछ प्रस्तावों पर मुहर लगाना चाहते थे, लेकिन उनकी सदस्यों ने नहीं चलने दी। इन्हीं सबको झेलते हुए वह आगे बढ़ते गए। शिक्षकों के बीच वह तब छा गए जब उन्होंने पीएचडी इंक्रीमेंट यूजीसी से लागू करवाया, क्योंकि वर्षों से शिक्षक इसका इंतजार कर रहे थे। उनके प्रयास से देश के अन्य शिक्षकों को भी इसका लाभ मिला। हालांकि पुटा ने वीसी के कई निर्णयों का समय-समय पर विरोध किया और चांसलर कार्यालय को भी अवगत कराया था।
भाजपा नेताओं को कभी नाराज नहीं किया
इसके अलावा रूसा से 110 शोध प्रस्ताव पास करवाए और 55 करोड़ रुपये मंजूर करवाए। 37 से अधिक राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एमओयू करवाए। उनके कार्यकाल के दौरान ही वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग में पीयू के 23 वैज्ञानिक छाए। दो बार माका ट्रॉफी भी उनके तीन साल के कार्यकाल के दौरान आई। कोविड में तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों का ऑनलाइन एग्जाम सफलतापूर्वक करवाया। साथ ही ऑनलाइन डिग्रियां भी मुहैया करवाई। सीनेट व सिंडिकेट में विवाद तब बढ़ गया जब वह किसी दूसरे शिक्षक को डीएसडब्ल्यू लगाना चाहते थे। सदस्य उस समय के डीएसडब्ल्यू को ही एक्सटेंशन देना चाहते थे। इस मुद्दे पर सीनेट कांग्रेस बनाम भाजपा हो गई। इस दौरान एक केंद्रीय मंत्री के अलावा सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन, डॉ. सुभाष शर्मा आदि भी थे। वीसी ने यहां मोर्चा संभाले रखा और डीएसडब्ल्यू का कार्यकाल नहीं बढ़ाया। भाजपा के सभी नेताओं ने उनके इस निर्णय की प्रशंसा की और भाजपा नेताओं के चहेते बन गए। हालांकि डीएसडब्ल्यू का कार्यकाल हाईकोर्ट के जरिए बढ़ाया गया। सूत्रों का कहना है कि उनका कार्यकाल बढ़ने का एक कारण यह भी है कि उन्होंने स्थानीय व बाहर के भाजपा नेताओं को नाराज नहीं किया। शासन सुधार पर अपने निर्णय अड़े रहना, उच्च स्तरीय समिति का गठन करवाना भाजपा नेताओं को और भा गया। कोरोना के कारण सीनेट का चुनाव न कराने का फैसला भी उनके हित में रहा। क्योंकि इस मामले में कांग्रेस बनाम भाजपा सदस्य हो गए थे। कुल मिलाकर भाजपा खेमा वीसी के कार्यकाल बढ़ाए जाने से अधिक खुश है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें