चंडीगढ़। विमान पर सवार होकर विद्या की देवी मां सरस्वती लेह और श्रीनगर के लिए जाएंगी। वहां पर सैनिक उनकी पूजा करेंगे। मां की प्रतिमा सेक्टर-47 स्थित कालीबाड़ी में तैयार हो रही है। इसके लिए प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पिछले दो महीना से कारीगर प्रतिमाएं बनाने में लगे हैं।
16 फरवरी को बसंत पंचमी है। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। सेक्टर-47 में तैयार हो रही प्रतिमाओं को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न शहरों के अलावा चंडीगढ़, श्रीनगर, जम्मू सहित अन्य इलाकों में भक्त ले जाएंगे और प्रतिमाओं की पूजा करेंगे।
एक फुट से लेकर आठ फुट तक हैं प्रतिमाएं
बन रही प्रतिमाएं एक फुट से लेकर लेकर आठ फुट तक की हैं। इनका अलग अलग डिजाइन है। आकर्षक परिधान में मां को सजाया जा रहा है। इसके लिए दो महीना से छह मूर्तिकार लगातार काम कर रहे हैं। सजावट का सामान कोलकाता से मंगाया गया है। सजावट के सामान में रंग से लेकर कपड़ा, गहने सहित कोलकाता से मंगाया जा रहा है। कुछ सामान पहुंच गया है और कुछ सामान शनिवार तक पहुंचेगा। सभी प्रतिमाओं को 15 फरवरी की शाम तक पूरा कर दिया जाएगा। प्रतिमाओं का शुल्क एक हजार से लेकर दस हजार रुपये तक की है। बड़ी प्रतिमाओं को स्थानीय लोग अधिक पसंद करते हैं। दूर के लिए भेजी जानी वाली प्रतिमाओं को सावधानीपूर्वक पैक किया जाता है। कालीबाड़ी में छोटी बड़ी मिलाकर करीब 80 प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं।
क्या कहते हैं कारीगर
प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिमाओं में अलग अलग डिजाइन हैं। मां की प्रतिमा श्रीनगर, लेह और लद्दाख जा रही है। मां सरस्वती विमान से जाएंगी। वहां के लोगों ने मां की प्रतिमा का ऑर्डर दिया था। प्रतिमा तैयार की जा रही हैं। सैनिक मां की प्रतिमा की पूजा करेंगे।
-खोकन अधिकारी, मूर्तिकार, कालीबाड़ी सेक्टर-47 चंडीगढ़।