मदर्स डे की पूर्व संध्या पर एक मां ने दुनिया से जाते-जाते दूसरी मां को अनमोल तोहफा दे दिया। चंडीगढ़ सेक्टर- 25 निवासी जसविंदर कौर को एक्सीडेंट के बाद पीजीआई में दाखिल कराया गया था। ब्रेन डेड होने के बाद उनके अंगों को डोनेट किया गया। जसविंदर का हार्ट लुधियाना के जगरांव के रहने वाले 23 वर्षीय युवक के काम आ गया।
युवक का हार्ट सिर्फ 20 प्रतिशत काम कर रहा था। डाक्टरों ने कह दिया था कि युवक ज्यादा दिन तक नहीं जी सकता। युवक की मां प्रकाश कौर ने बताया कि मुझे परमात्मा पर पूरा विश्वास था। डोनर जसविंदर मेरे लिए परमात्मा का स्वरूप बनकर आई। मेरे लिए यह किसी अनमोल तोहफे से भी बढ़कर है।
पिछले साल से बिगड़ने लगी थी तबीयत
युवक के पिता कुलदीप ने बताया कि नवंबर में उनके बेटे को खांसी आनी शुरू हो गई थी। लुधियाना के डीएमसी में चेस्ट स्पेशलिस्ट ने जांच की। लेकिन हार्ट का चेकअप नहीं किया। उल्टा एलर्जी की दवा दे दी। इसके बाद वे वापस गांव चले गए। वहां दोबारा से तबीयत खराब हो गई। फिर से स्थानीय डाक्टर को दिखाया। डाक्टर ने इको चेक किया तो पता चला कि हार्ट काम नहीं कर रहा। वहां से पीजीआई ले आए।
पीजीआई का चौथा ट्रांसप्लांट
पीजीआई का यह चौथा ट्रांसप्लांट है। इससे पहले पीजीआई तीन ट्रांसप्लांट कर चुका है। दुर्भाग्य से दो मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि एक पेशेंट ठीक है। जसविंदर कौर के परिजनों ने जैसे ही आर्गन डोनेशन की अनुमति दी, उसके बाद पीजीआई की टीम ट्रांसप्लांट में जुट गई। कई टीमों ने इस काम को अंजाम दिया है। इसमें ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी और कार्डियोलाजी की टीम व अन्य स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई।