पैरासीटामॉल पर पुलिस ने लगा दी एनडीपीएस की धाराएं
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घर में सिर दर्द या बुखार की दवा मिलना आम बात है, लेकिन अगर अब ये आपके घर में मिली तो खैर नहीं है। सुनने में अजीब जरुर लगेगा लेकिन पंजाब पुलिस की कारनामे हैं ही ऐसे कि ऐसा कहना गलत नहीं होगा। पंजाब पुलिस के कारनामे जगजाहिर हैं। पुलिस किस तरह आम आदमी को नशा तस्कर बताकर जेल भेज देती है, इसका सबूत राजबीर सिंह उर्फ लाडा निवासी अमृतसर के सुल्तानविंड हैं।
थाना सुल्तानविंड के एएसआई विनोद कुमार ने 27 अप्रैल 2015 को नाकाबंदी के दौरान राजबीर के पास से पैरासीटामॉल (बुखार की दवा) के सौ कैप्सूल पकड़े थे। पुलिस ने बुखार की इस दवा को नशे की पूर्ति के लिए गलत इस्तेमाल बताते हुए एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लगा दी।
लाडा कहता रहा कि यह बुखार की दवा है, लेकिन पुलिस ने उसे नशा तस्करी का आरोपी करार देते हुए एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया। करीब एक साल बाद रिपोर्ट आई तो पता चला कि यह दवा बुखार की थी। मामले में अमृतसर के एडिशनल सेशन जज अवतार सिंह ने राजबीर सिंह लाडा को बरी कर दिया है।