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घर में रखी मिली अगर ये दवा, तो आप भी हो सकते हैं नशा तस्कर

Sun, 14 May 2017 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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पैरासीटामॉल पर पुलिस ने लगा दी एनडीपीएस की धाराएं - फोटो : Demo Pic
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घर में सिर दर्द या बुखार की दवा मिलना आम बात है, लेकिन अगर अब ये आपके घर में मिली तो खैर नहीं है। सुनने में अजीब जरुर लगेगा लेकिन पंजाब पुलिस की कारनामे हैं ही ऐसे कि ऐसा कहना गलत नहीं होगा। पंजाब पुलिस के कारनामे जगजाहिर हैं। पुलिस किस तरह आम आदमी को नशा तस्कर बताकर जेल भेज देती है, इसका सबूत राजबीर सिंह उर्फ लाडा निवासी अमृतसर के सुल्तानविंड हैं।
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थाना सुल्तानविंड के एएसआई विनोद कुमार ने 27 अप्रैल 2015 को नाकाबंदी के दौरान राजबीर के पास से पैरासीटामॉल (बुखार की दवा) के सौ कैप्सूल पकड़े थे। पुलिस ने बुखार की इस दवा को नशे की पूर्ति के लिए गलत इस्तेमाल बताते हुए एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लगा दी। 

लाडा कहता रहा कि यह बुखार की दवा है, लेकिन पुलिस ने उसे नशा तस्करी का आरोपी करार देते हुए एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया। करीब एक साल बाद रिपोर्ट आई तो पता चला कि यह दवा बुखार की थी। मामले में अमृतसर के एडिशनल सेशन जज अवतार सिंह ने राजबीर सिंह लाडा को बरी कर दिया है। 
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बुखार की दवा के सौ कैप्सूल ने आम आदमी को बना दिया नशा तस्कर

पैरासीटामॉल पर पुलिस ने लगा दी एनडीपीएस की धाराएं - फोटो : Demo Pic
राजबीर की पैरवी कर रही एडवोकेट डीके बेदी ने बताया कि पुलिस ने लाडा को आम आदमी से नशा तस्कर बना दिया। उसे जेल भेज दिया गया। डेढ़ महीने बाद उसकी जमानत हुई। अदालत में पुलिस साबित नहीं कर सकी कि उसने एनडीपीएस की धाराएं क्यों जोड़ी। जबकि दवा की मेडिकल रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि यह दवा बुखार की है।

 अब मामले में मामला दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ मानहानि ही नहीं, मानसिक प्रताड़ना को लेकर अदालत में केस दायर करेंगे। इसी के साथ ही डीजीपी पंजाब व मुख्यमंत्री पंजाब को इस मामले में जांच के लिए पत्र लिखेंगी।
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