प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद स्टाफ के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में डॉक्टर शनिवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। इसके चलते संस्थान में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। हड़ताल की सूचना के कारण शनिवार को आम दिनों की तुलना में आधे मरीज भी पीजीआई नहीं पहुंचे।
वार्डों में भर्ती मरीजों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इससे ज्यादातर मरीज पीजीआई छोड़कर चले गए। उधर हड़ताली डॉक्टरों और शासन में टकराव बढ़ता दिख रहा है। डॉक्टरों ने जहां पीजीआई स्टाफ पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है, वहीं वरिष्ठ आईएएस अफसर व डीएमआरई प्रदीप कासनी ने एफआईआर वापस लेने से साफ इंकार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई स्टाफ के खिलाफ कानूनी तरीके से मुकदमा दर्ज किया गया है। वह किसी के विरोध से वापस नहीं होगा। वहीं, अंदरखाने विरोध झेल रहे हड़ताली डॉक्टरों ने सीनियर डॉक्टरों से भी सहयोग मांगना शुरू कर दिया है।
संस्थान के उच्च अधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताली डॉक्टरों को मनाने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार को परीक्षा के बाद हड़तालियों ने पीजी हॉस्टल में गुप्त संयुक्त बैठक भी की।
पीजीआई प्रबंधन बोला, बिना नोटिस है हड़ताल
इस्तीफा देने वाले कार्यवाहक निदेशक डॉ. के. बी. गुप्ता और एमएस डॉ. अशोक चौहान ने बताया कि पीजी, इंटर्न और कुछ एसआर डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इन्होंने हड़ताल का कोई नोटिस नहीं दिया था। केवल मौखिक बताया था। हम उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस मामले की जानकारी सरकार को दे दी गई है।
नहीं दी हड़ताल की सूचना : कासनी
प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी प्रदीप कासनी ने बताया कि पीजीआई के उच्च अधिकारियों ने स्वास्थ्य महकमे को हड़ताल की सूचना नहीं दी है। हमसे कहा गया है कि कुछ जूनियर डॉक्टर उतावले होकर हंगामा कर रहे हैं और काम पर नहीं आ रहे हैं। हंगामा करने वालों की लिस्ट हमारे पास आ गई है। हम किसी के दबाव में नहीं आएंगे।
ये हैं हड़ताली डॉक्टरों की मांग
एफआईआर को रद किया जाए। हालांकि अभी इसमें किसी का नाम नहीं है।संस्थान में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध हो। मीडिया को कवरेज करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।पीजीआई के मामलों में नेताओं का हस्तक्षेप बंद हो।क्लीनिकल मामलों की किसी बाहरी आदमी को कोई जानकारी नहीं होती।
सामान्य अस्पताल में बढ़े मरीज
हड़ताल के चलते सामान्य दिनों की अपेक्षा जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों लगभग दोगुने मरीज पहुंचे। एक निजी अस्पताल संचालक ने बताया कि पहले पीजीआई से परेशान होकर मरीज हमारे पास आते थे, इन दिनों सीधे ही आ रहे हैं। वहीं रोहतक जिला अस्पताल में रोजाना की अपेक्षा करीब 300 मरीज बढ़ गए।
इधर, पीजीआई में सामान्य दिनों की अपेक्षा 60 फीसदी मरीज कम पहुंचे। रोजाना 1000 के करीब पहुंचने वाले मरीजों की संख्या शनिवार शाम तक महज 350 ही रही। ओपीडी में भी करीब 3000 मरीज ही पहुंचे, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।