शहर में क्लाउड किचन का स्टार्टअप चलाने वाले एक उद्योगपति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह कई दुकानों को खाने का सामान सप्लाई करते थे। व्यवसाय अच्छा चल रहा था और योजना के अनुसार वर्ष 2022-23 तक सिर्फ चंडीगढ़ में ही 10 से 12 स्टोर खोलने का लक्ष्य था। इसके लिए काम जारी था लेकिन कोविड की वजह से पूरी सप्लाई चेन टूट गई। जिन दुकानों को वह खाने का सामान देते थे, उनमें से ही कई बंद हो गए। डिमांड खत्म हो गई और कर्ज बढ़ता रहा। मजबूरन कंपनी को बंद करना पड़ा।
काम बंद रहा, बैंक लोन बढ़ता रहा
लॉकडाउन के दौरान कंपनियों के बंद होने का सबसे कारण बैंक लोन है। लॉकडाउन की वजह से काम पूरी तरह से ठप था लेकिन किराया, ईएमआई, बिजली बिल आदि का जाना जारी रहा। यह सब चुकाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कंपनी बंद करने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। सरकार को मदद करनी चाहिए थी।- ऋषभ, स्टार्टअप सलाहकार।
अभी भी उद्योगों का पलायन जारी
शहर में नए उद्योग शुरू नहीं हो रहे हैं क्योंकि ज्यादातर प्लॉट्स के टाइटल साफ नहीं हैं। प्रशासन की ट्रांसफर फीस इतनी ज्यादा है कि कोई नया काम शुरू ही नहीं करना चाहता। प्रशासन अपनी नीतियों में बदलाव करेगा तभी उद्योग बचेंगे। इन सब कारणों की वजह शहर का उद्योग पलायन कर रहा है।- नवीन मंगलानी, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज।
प्रशासन मदद करता तो दूसरी होती तस्वीर
लॉकडाउन का सबसे बड़ा असर छोटी कंपनियों व रेस्टोरेंट की चेन पर पड़ा है। कंपनियों के बंद होने का असर सेक्टर-26 और सेक्टर-7 में साफ देखा जा सकता है। कई बड़े रेस्टोरेंट पहले वहां थे, जो अब बंद हो चुके हैं। कारण कई हैं, जिनमें बैंक कर्ज नहीं चुका पाना और किराया माफ नहीं होना है। प्रशासन मदद करता तो तस्वीर दूसरी होती। - एमपीएस चावला, अध्यक्ष, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन।