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Chandigarh News: पीयू में 50% से ज्यादा छात्राएं, फिर भी महिला उम्मीदवार क्यों हारीं

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) छात्र संघ चुनाव के नतीजे कई सवाल खड़े करते हैं। यूनिवर्सिटी में 16,124 छात्रों में 50% से अधिक लड़कियां हैं, फिर भी छात्र संघ के शीर्ष पदों पर महिला उम्मीदवारों को जीत क्यों नहीं मिल पाई? इस बार के चुनाव में कोमलप्रीत कौर को छोड़कर किसी भी महिला उम्मीदवार को 500 से ज्यादा वोट नहीं मिल सके।
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चुनाव से पहले अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं ने खुलकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि पीयू का माहौल छात्राओं को राजनीति में आने से रोकता है। उन्हें वह जगह और सम्मान नहीं दिया जाता, जहां वे अपनी योग्यता साबित कर सकें। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया था कि छात्र संगठन अक्सर वोट पाने के लिए महिलाओं को सिर्फ मोहरा बनाते हैं लेकिन महत्वपूर्ण फैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल नहीं किया जाता।
तीन महिला उम्मीदवार मैदान में थीं
पीयू के इतिहास में आज तक केवल एक ही महिला उम्मीदवार प्रेसिडेंट बन पाई हैं। इस बार प्रेसिडेंट पद के लिए तीन महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। इनमें नवनीत कौर (अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन) को 136 वोट मिले। सीरत (स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया) को 422 वोट मिले। अरदास कौर (सोपू) को 318 वोट मिले।
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सचिव पद के लिए आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई, एएसएपी से कोमलप्रीत कौर को 1735 वोट मिले लेकिन वह भी जीत हासिल नहीं कर पाईं। इन नतीजों से यह साफ होता है कि पीयू में महिला सशक्तिकरण की बात तो होती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। छात्र राजनीति में महिलाओं का आगे न आ पाना यूनिवर्सिटी में लैंगिक असमानता की गहरी जड़ों को दर्शाता है, जिसे दूर करने की जरूरत है।
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