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Haryana Assembly Election: कई विधायकों की टिकट कटने का खतरा, भाजपा और कांग्रेस को मजबूत चेहरों की तलाश

Tue, 20 Aug 2024 02:26 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस पांच-पांच सीटें जीतकर बराबरी पर रही हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 44 और कांग्रेस को 42 विधानसभा हलकों में बढ़त मिली थी। तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने 60 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। वहीं कांग्रेस दस साल बाद सत्ता वापसी की कोशिश में है। दोनों ही दल प्रत्याशियों के चयन को लेकर पूरी गंभीरता बरत रहे हैं।
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नायब सिंह सैनी और भूपेंद्र हुड्डा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में 30 से अधिक मौजूदा विधायकों की टिकटें कटने का खतरा मंडरा रहा है। इनमें भाजपा के 20 से अधिक और कांग्रेस के 12 से अधिक विधायक शामिल हैं। इन विधायकों के खिलाफ अपने-अपने हलकों में जबरदस्त एंटी इंकम्बेंसी है। दोनों ही पार्टियों के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। दोनों ही दलों को अब इन विधायकों के स्थान पर जिताऊ नए चेहरों को तलाश है।

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सर्वे रिपोर्ट दोनों ही दलों ने हाईकमान के पास भेज दी है। भाजपा ने साफ कर दिया है कि जो विधायक बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया और जिनके खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी है, उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। इसी प्रकार, कांग्रेस के ऐसे 10 विधायक हैं, जो पूरे पांच साल न तो फील्ड में कुछ कर पाए और न ही विधानसभा में अपने हलकों का आवाज बुलंद कर पाए। इनमें कई बुजुर्ग नेता शामिल हैं, जो कई बार से विधायक बनते आ रहे हैं। इनके स्थान पर युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी है।

लोकसभा में मिले वोटों से तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड

टिकटों के वितरण में जहां सर्वे को आधार बनाया जा रहा है, वहीं लोकसभा चुनाव में मिले वोटों से भी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तय किया जा रहा है। दोनों ही दल लोकसभा चुनाव में जिस-जिस विधानसभा हलके से उनकी पार्टी को बढ़त मिली है, वहां पर विधायक का टिकट सुरक्षित माना जा रहा है। इनके अलावा जहां-जहां पर पार्टी प्रत्याशी को कम वोट मिले, उन सीटों पर पार्टी अधिक फोकस कर रही हैं। इसी के चलते भाजपा ने फैसला लिया है कि जो भी पदाधिकारी टिकट के लिए आवेदन करेगा, उसको पद छोड़ना होगा। इसी प्रकार कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि पिछले दो बार से लगातार चुनाव हारने वाले या फिर जमानत जब्त कराने वाले नेताओं को टिकटें नहीं दी जाएंगी।

कांग्रेस के इन विधायकों का प्रदर्शन रहा था खराब

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 12 विधायकों के हलकों में भाजपा ने बढ़त बनाई थी। इनमें कालका से विधायक प्रदीप चौधरी, रादौर से बिशनलाल सैनी, लाडवा से मेवा सिंह, तोशाम से किरण चौधरी, महेंद्रगढ़ में राव दान सिंह, एनआईटी फरीदाबाद से नीरज शर्मा, सोनीपत से सुरेंद्र पंवार, रेवाड़ी में चिरंजीवी राव, समालखा से धर्म सिंह छौक्कर, सफीदों से सुभाष देशवाल, इसराना से बलबीर वाल्मीकि और असंध से शमशेर गोगी के हलके से भाजपा आगे रही थी।

मंत्री और विधायक नहीं दिला पाए भाजपा को जीत

लोकसभा में भाजपा के 4 मंत्रियों और डिप्टी स्पीकर समेत 6 विधायकों के हलकों में कांग्रेस को जीत मिली थी। इनमें जगाधरी से मंत्री कंवरपाल, परिवहन मंत्री असीम गोयल के अंबाला सिटी, वित्त मंत्री जेपी दलाल के लोहारू, सामाजिक अधिकारिता मंत्री बिशंबर वाल्मीकि के बवानीखेड़ा, विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा के नलवा हलके से भाजपा हार गई थी। विधायकों में भव्य बिश्नोई के आदमपुर, दुड़ाराम के फतेहाबाद, प्रवीन डागर के हथीन, जगदीश नायर के होडल, पूर्व मंत्री संदीप सिंह के पिहोवा और पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा के कलायत विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस जीती थी।

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